राष्ट्रीय

Women Reservation Bill: संसद में शाह की हुंकार, ‘आरक्षण पर राजनीति नहीं, हम देंगे महिलाओं को स्थायी अधिकार’

Women Reservation Bill:  संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) के दौरान देश की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। सरकार ने महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और बहुचर्चित परिसीमन (Delimitation) विधेयक लोकसभा में पेश किए। इस सत्र की शुरुआत से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का सिलसिला जारी है। जहां एक ओर कांग्रेस ने इस बिल के ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर सरकार को घेरा, वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए सभी शंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया।

प्रियंका गांधी का हमला और परिसीमन पर दक्षिण का डर

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए महिला आरक्षण की वैचारिक नींव का श्रेय मोतीलाल नेहरू को दिया और भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा रुख पर सवाल खड़े किए। प्रियंका ने विशेष रूप से परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि नए परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को खतरा हो सकता है। विपक्ष की मुख्य चिंता यह है कि यदि 2011 के जनगणना आंकड़ों के आधार पर आबादी को मानक मानकर सीटें बढ़ाई गईं, तो उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों का वर्चस्व बढ़ जाएगा और दक्षिण भारतीय राज्य संसदीय राजनीति में हाशिए पर चले जाएंगे।

अमित शाह का आश्वासन: दक्षिण की सीटें कम नहीं, बल्कि बढ़ेंगी

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष की इन शिकायतों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों में प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। शाह के मुताबिक, तेलंगाना की सीटें 17 से बढ़कर 26, कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 और तमिलनाडु की लोकसभा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। सरकार ने तर्क दिया कि सीटों में 50 प्रतिशत की कुल वृद्धि की योजना से संघवाद (Federalism) का ढांचा मजबूत होगा और हर राज्य को संसद में पहले से अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।

2029 के चुनाव और विपक्ष पर तंज

महिला आरक्षण को लागू करने की समयसीमा पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि 2029 तक सभी चुनाव पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही होंगे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की ओर इशारा करते हुए तंज कसा कि किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। शाह ने चुटकी लेते हुए कहा कि “वे जीतेंगे नहीं, यह अलग बात है, मगर डरने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सरकार केवल सत्ता में बने रहने के लिए यह बिल लाई है। शाह ने कहा कि जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं, वे शायद भाजपा की लोकतांत्रिक शक्ति और जनता के समर्थन को ठीक से नहीं पहचानते।

जाति जनगणना पर सरकार का बड़ा ऐलान

सदन में चर्चा के दौरान अमित शाह ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जाति जनगणना से पीछे नहीं हट रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने यह निर्णय लिया है कि अगली जनगणना जाति आधारित ही होगी। उन्होंने इस भ्रम को दूर किया कि वर्तमान प्रश्नावली में जाति का जिक्र नहीं है। शाह ने समझाया कि जनगणना दो चरणों में होती है—पहले चरण में मकानों का सूचीकरण (Houselisting) किया जाता है और दूसरे चरण में उन मकानों में रहने वाले व्यक्तियों का विवरण लिया जाता है, जिसमें जाति संबंधी आंकड़े भी शामिल होंगे।

फेडरलिज्म और राजनीतिक मंशा पर सवाल

विपक्ष का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करना उन राज्यों के साथ अन्याय है जिन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। विपक्ष के अनुसार, हिंदी हार्टलैंड का ‘ड्राइवर सीट’ पर आना लोकतंत्र के संतुलन को बिगाड़ सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि उनकी मंशा पारदर्शी है और वे सभी वर्गों और क्षेत्रों को समान न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब देखना यह है कि संसद का यह विशेष सत्र भारतीय राजनीति की दिशा में क्या स्थायी बदलाव लेकर आता है।

Read More: Women Reservation Bill : महिला आरक्षण या चुनावी साजिश? प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार की नीयत को ललकारा

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