Amit Shah Mayapur Visit
Amit Shah Mayapur Visit: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का मायापुर दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। शाह ने अपनी यात्रा के दौरान राजनीति से ऊपर उठकर आध्यात्मिक संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया, “आज मैं यहां देश के गृह मंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि श्री चैतन्य महाप्रभु के एक विनम्र भक्त के रूप में उपस्थित हुआ हूं।” हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले कृष्ण की शरण में जाना और भक्ति आंदोलन की बात करना, बंगाल की जनता की धार्मिक भावनाओं को छूने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘हरे कृष्ण’ के जयघोष के साथ की, जिसने वहां मौजूद भक्तों में उत्साह भर दिया। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से मायापुर आना चाहते थे, लेकिन व्यस्तता के कारण यह कार्यक्रम टलता रहा। अंदरूनी सूत्रों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का आरोप है कि शाह ने जिस कुशलता से खुद को चैतन्य महाप्रभु के भक्त के रूप में पेश किया है, वह दरअसल हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने की कोशिश है। आलोचकों का मानना है कि भाजपा चुनाव से पहले धर्म को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है ताकि मतदाताओं के बीच एक विशेष वैचारिक संदेश भेजा जा सके।
शाह का यह दौरा श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर महाराज की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के निमित्त था। मायापुर पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और संतों का आशीर्वाद लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने वहां उपस्थित समुदाय के प्रति सम्मान प्रकट किया और इस पवित्र भूमि पर आने के अवसर के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि चैतन्य देव की इस धरती पर कदम रखकर वह स्वयं को धन्य और कृतज्ञ महसूस कर रहे हैं।
अमित शाह ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश भी साझा किया। उन्होंने बताया, “मायापुर आने से पहले आज सुबह मेरी प्रधानमंत्री से बात हुई थी। जब मैंने उन्हें अपनी यात्रा के बारे में बताया, तो उन्होंने विशेष रूप से मायापुर के सभी भक्तों और इस्कॉन समुदाय को ‘हरे कृष्ण’ कहकर अपनी शुभकामनाएं और अभिवादन भेजने का आग्रह किया।” इस संदेश के जरिए शाह ने यह दिखाने की कोशिश की कि केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के मन में बंगाल की आध्यात्मिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान है।
अमित शाह ने श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा शुरू किए गए भक्ति आंदोलन की ऐतिहासिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चैतन्य देव ने न केवल भक्ति की एक नई धारा प्रवाहित की, बल्कि उसे पूरी दुनिया में फैलाकर मानवता को प्रेम का संदेश दिया। शाह के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर आने से व्यक्ति की चेतना जागृत होती है। उनके शब्दों में भक्ति और श्रद्धा का भाव स्पष्ट झलक रहा था, जिसे कुछ लोग शुद्ध आस्था तो कुछ लोग ‘चुनावी भक्ति’ का नाम दे रहे हैं।
अमित शाह के इस दौरे पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। टीएमसी सांसद महुआ मैत्रा ने शाह की यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव से ऐन पहले इस तरह के ‘धार्मिक दौरों’ का असली मकसद जनता भली-भांति समझती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह दौरा केवल निजी आस्था का विषय है या इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति छिपी है। मैत्रा के अनुसार, इस्कॉन मंदिर जाना किसी का भी व्यक्तिगत अधिकार हो सकता है, लेकिन जब देश का गृह मंत्री चुनाव से पहले ऐसा करता है, तो उसके राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
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