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Bengal Political Controversy: पश्चिम बंगाल में राहत कार्यों को लेकर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का तंज, “राज्य सरकार को 4,470 करोड़ का हिसाब देना होगा”

Bengal Political Controversy: पश्चिम बंगाल में प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनज़र राहत कार्यों को लेकर राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है और जनता को वास्तविक राहत नहीं मिल रही है।

“हम राजनीतिक दल हैं, सरकार के पास है ज्यादा शक्ति”

डॉ. सुकांत मजूमदार ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हमारी पार्टी भाजपा जनता की मदद करने का प्रयास कर रही है, लेकिन हमारी सीमाएं हैं। सरकार के पास प्रशासनिक ताकत होती है और उन्हें पूरी निष्ठा के साथ राहत कार्य करने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF) और राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF) के जरिए राज्य सरकार को हर साल बड़ी रकम दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद राहत कार्यों में लापरवाही साफ दिख रही है।

“2021 से अब तक 4,470 करोड़ रुपये दिए गए, हिसाब दे TMC”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से जानकारी मिली है कि 2021-22 से अब तक SDRF के तहत पश्चिम बंगाल सरकार को 4,470 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उनका सीधा सवाल था, “यह पैसा कहां गया? TMC को इसका हिसाब देना ही होगा।”उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र से मदद न मिलने का झूठा प्रचार कर रही है, जबकि हकीकत इसके ठीक विपरीत है।

राज्य सरकार पर झूठ फैलाने का आरोप

सुकांत मजूमदार ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर झूठी बयानबाज़ी करने का आरोप लगाते हुए कहा, “राज्य सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि केंद्र ने कोई मदद नहीं की, जबकि दस्तावेज़ बताते हैं कि केंद्र लगातार आर्थिक सहायता दे रहा है। यह जनता को गुमराह करने की कोशिश है।”

केंद्र और राज्य के बीच टकराव

पश्चिम बंगाल में कई बार प्राकृतिक आपदाएं—जैसे बाढ़, चक्रवात, भारी बारिश—आती रही हैं, और हर बार केंद्र व राज्य सरकार के बीच राजनीतिक खींचतान देखने को मिली है। केंद्र सरकार का आरोप है कि राज्य सरकार फंड का सही उपयोग नहीं कर रही, जबकि राज्य का दावा होता है कि उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिलती।डॉ. सुकांत मजूमदार के इस बयान से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तीखा हो सकता है। जनता की उम्मीद यही है कि राजनीति से ऊपर उठकर दोनों सरकारें मिलकर वास्तविक राहत कार्यों पर ध्यान दें।

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