राजनीति

Bengal Polls 2026: ओवैसी-हुमायूँ कबीर का गठबंधन, ममता बनर्जी के ‘मुस्लिम वोट बैंक’ में बड़ी सेंध की तैयारी?

Bengal Polls 2026:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को मुर्शिदाबाद जिले के नाओडा में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित किया। हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली एजेयूपी (AJUP) के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित इस रैली में ओवैसी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में दशकों से मुसलमानों का शोषण हो रहा है और अब समय आ गया है कि समुदाय अपनी राजनीतिक दिशा खुद तय करे। ओवैसी के इस रुख ने बंगाल के चुनावी समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है।

‘वोट बैंक’ की राजनीति और विकास की अनदेखी

असदुद्दीन ओवैसी ने रैली के दौरान टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों पर मुसलमानों को केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में मुस्लिम समुदाय ने कांग्रेस, वाम मोर्चा और अब तृणमूल कांग्रेस पर भरोसा जताया और उन्हें जमकर वोट दिए, लेकिन बदले में उन्हें केवल पिछड़ापन मिला। ओवैसी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है, लेकिन सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व महज 7 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों की सत्ता के बाद भी यह भेदभाव क्यों बरकरार है?

हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन की रणनीतिक वजह

एआईएमआईएम प्रमुख ने एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर के साथ हाथ मिलाने के पीछे की ठोस वजह भी जनता के सामने रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि बंगाल के मुसलमानों को निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए बनाया गया है। ओवैसी ने कहा, “हमने कबीर के साथ इसलिए हाथ मिलाया है ताकि मुसलमानों का वास्तविक विकास सुनिश्चित हो सके। हम मिलकर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को ऐसा करारा झटका देंगे, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने बीच से ऐसे नेतृत्व को चुनें जो उनके आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा कर सके।

ममता बनर्जी और भाजपा के बीच ‘गुप्त समझौते’ का दावा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला जारी रखते हुए ओवैसी ने उन पर पाखंड करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी का भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ एक ‘गुप्त समझौता’ है और उनकी रणनीतियां अब जनता के सामने उजागर हो चुकी हैं। ओवैसी ने टीएमसी के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि एआईएमआईएम और एजेयूपी केवल टीएमसी के वोट शेयर को कम करने और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा और टीएमसी उनके लिए एक समान हैं और दोनों ही देश की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना का उल्लंघन कर रहे हैं।

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर शोषण को रोकने का आह्वान

ओवैसी ने रैली में मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि अब शोषण को बर्दाश्त करने का समय खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, “भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमारा गठबंधन चाहता है कि मुसलमानों को अपनी आवाज उठाने और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ने का मौका मिले।” उन्होंने मतदाताओं को आगाह किया कि वे धर्मनिरपेक्षता के झूठे नारों के जाल में न फंसें और अपने आर्थिक विकास को प्राथमिकता दें। ओवैसी के अनुसार, बंगाल का मुसलमान अब जागरूक हो चुका है और वह अपनी सुरक्षा और तरक्की के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने को तैयार है।

चुनाव की तारीखें और मतगणना का इंतजार

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनावी रण अब अपने निर्णायक दौर में है। ओवैसी की इस सक्रियता ने विशेष रूप से मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में टीएमसी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बता दें कि बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना निर्धारित है। लोकतंत्र के इस महापर्व के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ओवैसी का यह चुनावी दौरा और कड़े तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि इस बार का मुकाबला केवल दोतरफा नहीं, बल्कि बहुकोणीय होने वाला है, जिसमें छोटे दलों की भूमिका किंगमेकर की हो सकती है।

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