Ankush Bharadwaj
Ankush Bharadwaj: भारतीय खेल जगत से एक ऐसी विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे खेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर 17 वर्षीय एक उभरती हुई नेशनल लेवल की महिला निशानेबाज के साथ यौन शोषण करने का बेहद गंभीर आरोप लगा है। यह घटना तब प्रकाश में आई जब पीड़ित खिलाड़ी ने साहस जुटाकर अपने साथ हुई इस आपबीती को साझा किया। मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कोच के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है। संघ ने पुष्टि की है कि फरीदाबाद में भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद उन्हें उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। NRAI के सचिव राजीव भाटिया ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को बताया कि संघ ने उन्हें नैतिक आधार पर निलंबित किया है और उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जा रहा है। भाटिया ने स्पष्ट किया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे किसी भी प्रकार की कोचिंग या खेल संबंधी गतिविधि का हिस्सा नहीं रहेंगे। अब खुद को निर्दोष साबित करने की पूरी जिम्मेदारी भारद्वाज पर है।
हैरानी की बात यह है कि अंकुश भारद्वाज को भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने NRAI की विशेष सिफारिश पर ही कोच नियुक्त किया था। साल 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए भेजी गई 37 सदस्यीय विशिष्ट कोचिंग टीम में भी भारद्वाज का नाम शामिल किया गया था। इतने महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाले पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा ऐसी हरकत ने खेल प्रेमियों और अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कोचों की नियुक्ति के समय उनके आचरण और पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच की गई थी।
अंकुश भारद्वाज का अतीत भी विवादों से मुक्त नहीं रहा है। साल 2010 में जब वे स्वयं एक सक्रिय निशानेबाज थे, तब उन पर ‘बीटा-ब्लॉकर’ नामक प्रतिबंधित दवा के इस्तेमाल के लिए डोपिंग प्रतिबंध लगाया गया था। डोपिंग के दाग के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोचिंग की जिम्मेदारी सौंपना अब खेल संघों की चयन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रहा है। एक दागी खिलाड़ी को इतने महत्वपूर्ण सुरक्षा वाले पद पर बैठाना प्रशासन की बड़ी चूक माना जा रहा है।
पीड़ित महिला निशानेबाज पिछले साल अगस्त से भारद्वाज के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थी। उसने बताया कि वह इस घिनौनी घटना के बाद से गहरे सदमे और मानसिक तनाव में है। काफी समय तक डर और संकोच में रहने के बाद, उसने हिम्मत दिखाई और 1 जनवरी को अपनी मां को इस पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद ही मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई। यह घटना एक बार फिर खेल अकादमियों में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
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