Anti Naxal Operation
Anti Naxal Operation: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित मैनपुर थाना क्षेत्र के दडईपानी पहाड़ी इलाके में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक और घातक हथियार बरामद किए गए हैं। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए इन हथियारों को पहाड़ियों के बीच छिपाकर रखा था, जिसे जवानों की मुस्तैदी ने समय रहते ढूंढ निकाला।
यह सफल ऑपरेशन गरियाबंद की ई-30 टीम, एसटीएफ (STF), 207 कोबरा बटालियन, 16वीं बटालियन सीएएफ (CAF) और 65वीं बटालियन सीआरपीएफ (CRPF) की एक संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दिया गया। पुलिस प्रशासन को सटीक खुफिया जानकारी मिली थी कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर स्थित घने जंगलों और पहाड़ियों में माओवादी संगठन ‘डीजीएन डिवीजन’ के सक्रिय सदस्य किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना के अनुसार, नक्सलियों ने पुलिस पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा भंडार डंप किया था।
प्राप्त सूचना की गंभीरता को देखते हुए 19 और 20 दिसंबर के बीच एक सघन तलाशी अभियान (Search Operation) छेड़ा गया। सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने रणनीतिक रूप से दडईपानी की दुर्गम पहाड़ियों को चारों ओर से घेर लिया। इस दौरान सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया ताकि नक्सलियों द्वारा लगाए गए किसी भी संभावित लैंडमाइन या आईईडी (IED) से बचा जा सके। जवानों ने जब पहाड़ियों और चट्टानों की गहराई से जांच शुरू की, तो उनके हाथ नक्सलियों का गुप्त ठिकाना लग गया।
चट्टानों के बीच प्लास्टिक के ड्रमों और स्टील के डिब्बों में नक्सलियों ने ‘मौत का सामान’ छिपाकर रखा था। तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों को जो सामान बरामद हुआ, वह नक्सलियों की खौफनाक साजिश की तस्दीक करता है। बरामद सामग्रियों की सूची इस प्रकार है:
01 नग कंपनी निर्मित मोर्टार: यह एक शक्तिशाली हथियार है जो दूर तक मार करने में सक्षम है।
01 नग भरमार बंदूक: स्थानीय स्तर पर निर्मित नक्सली हथियार।
22 नग मोर्टार सेल: मोर्टार के साथ इस्तेमाल होने वाले घातक गोले।
150 नग डेटोनेटर: आईईडी और अन्य विस्फोटकों को सक्रिय करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण।
18 नग तीर बम: जंगलों में घात लगाकर हमला करने के लिए नक्सलियों का विशेष हथियार।
विस्फोटक सामग्री: आईईडी और बम बनाने के लिए आवश्यक अन्य कच्चे पदार्थ।
गरियाबंद जिले का यह हिस्सा ओडिशा की सीमा से सटा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर नक्सली अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में भागने की कोशिश करते हैं। मोर्टार और बड़ी संख्या में डेटोनेटर का मिलना यह संकेत देता है कि नक्सली किसी कैंप या सुरक्षा घेरे पर हमला करने की योजना बना रहे थे। सुरक्षाबलों की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल नक्सलियों के मनोबल को तोड़ा है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण भी मजबूत किया है। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई।
हथियारों और विस्फोटकों की इस बड़ी खेप की बरामदगी के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे मैनपुर और सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इलाके में अभी भी कुछ अन्य डंप या नक्सलियों की मौजूदगी हो सकती है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि माओवादियों के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि उनके रसद और हथियारों की आपूर्ति को पूरी तरह से काटा जा सके।
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