Asha Bhosle Funeral
Asha Bhosle Funeral: भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार को 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली, जिससे पूरा देश स्तब्ध और शोकाकुल है। सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदा किया गया।
सोमवार का दिन मुंबई के लिए अत्यंत भारी रहा। सुरों की रानी आशा भोंसले का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान और राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। ‘आशा ताई अमर रहें’ के गगनभेदी नारों के बीच उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे आनंद भोंसले ने नम आंखों से अपनी माता को मुखाग्नि दी। जैसे ही चिता की लपटें आसमान की ओर उठीं, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। संगीत प्रेमियों के लिए यह क्षण एक अपूरणीय क्षति की तरह था।
आशा ताई का व्यक्तित्व जितना जिंदादिल था, उनकी विदाई भी वैसी ही गरिमामयी रही। अंतिम संस्कार के दौरान एक अनोखा दृश्य देखने को मिला जब संगीत जगत के दिग्गजों, जैसे शान और अनूप जलोटा ने आशा जी के ही सदाबहार गीतों को गाकर उन्हें नमन किया। वहां मौजूद कलाकारों ने संगीत के जरिए अपनी ‘आशा ताई’ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह नजारा संगीत की उस शक्ति को दर्शा रहा था, जिसे आशा जी ने पूरी दुनिया में फैलाया था।
आशा भोंसले पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। 11 अप्रैल को उन्हें सांस लेने में अचानक तकलीफ महसूस हुई, जिसके बाद उन्हें मुंबई के प्रसिद्ध ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए आईसीयू में रखा और हर संभव प्रयास किए, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उनके शरीर ने साथ देना छोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मल्टी-ऑर्गन फेलियर (कई अंगों का काम बंद कर देना) उनके निधन का मुख्य कारण बना।
आशा ताई के अंतिम दर्शन के लिए देश की तमाम बड़ी हस्तियां मुंबई पहुंचीं। मनोरंजन जगत से एआर रहमान, शबाना आजमी, रणवीर सिंह, तब्बू, जैकी श्रॉफ और विक्की कौशल जैसे सितारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। खेल जगत से सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद सिराज भी उन्हें नमन करने पहुंचे। राजनीति के गलियारों से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उनके योगदान को याद किया। पूरा वातावरण गमगीन था और हर कोई इस महान आवाज को खोने के दुख में डूबा था।
आशा भोंसले का जीवन प्रेरणा का एक जीवंत उदाहरण है। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म के गीत ‘चला चला नव बाल’ से की थी। 16 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘रात की रानी’ के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी पहली सोलो उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली सहित अन्य भाषाओं में 12,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी, जो आज भी एक वैश्विक रिकॉर्ड है।
भले ही आशा भोंसले शारीरिक रूप से पंचतत्व में विलीन हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज और उनके गाए गीत युगों-युगों तक गूंजते रहेंगे। पॉप, गजल, भजन और शास्त्रीय संगीत—हर विधा में उन्होंने अपनी महारत साबित की। उनका संघर्ष, उनकी मुस्कान और उनकी वह खनकती आवाज भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनी रहेगी। संगीत जगत में उनके स्थान को कभी नहीं भरा जा सकेगा, लेकिन उनके सुर हमेशा नई पीढ़ी के गायकों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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