Trump's claim on Iran
Trump’s claim on Iran : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष को लेकर एक ऐसा वक्तव्य दिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। फॉक्स न्यूज के साथ एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब अपने निर्णायक पड़ाव और अंत के बेहद करीब है। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में इस बात पर जोर दिया कि उनके द्वारा ईरान के खिलाफ उठाए गए कड़े सैन्य कदमों ने न केवल तेहरान को पीछे हटने पर मजबूर किया, बल्कि एक बड़ी वैश्विक आपदा को भी टाल दिया है।
ट्रंप ने साक्षात्कार के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यदि वे ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने और कड़े प्रतिबंध लगाने का साहसिक निर्णय नहीं लेते, तो आज ईरान एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन चुका होता। तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा, “अगर आज ईरान के पास परमाणु बम होता, तो दुनिया के हर देश को वहां के हुक्मरानों को ‘सर’ कहकर संबोधित करना पड़ता, और कोई भी स्वाभिमानी देश ऐसी स्थिति नहीं चाहता।” उनके इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका, ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियारों तक पहुंच बनाने से रोकना चाहता है।
यह बयान एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बनी है। हालांकि इस समझौते से प्रत्यक्ष हमलों में कमी आई है, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इसे अमेरिका की नरमी न समझा जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भले ही युद्ध खत्म होने के करीब हो, लेकिन अमेरिकी मिशन अभी अधूरा है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान के सैन्य और आर्थिक ढांचे को इतनी गहरी चोट पहुंचाई है कि उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में कम से कम 20 साल का समय लगेगा।
पिछले सप्ताह पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई गुप्त शांति वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान अब समझौते के लिए छटपटा रहा है। ट्रंप ने कहा, “ईरान की आर्थिक और सैन्य कमर टूट चुकी है, वे अब किसी भी तरह एक डील करना चाहते हैं। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है, लेकिन मुझे लगता है कि वे अब बातचीत की मेज पर आने के लिए बेकरार हैं।” ट्रंप का मानना है कि उनका अत्यधिक सैन्य दबाव ही ईरान को एक ऐसी संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करेगा, जो उसके परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा देगी।
युद्ध की विभीषिका का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका आज हमले रोक भी देता है, तब भी ईरान को हुए नुकसान की भरपाई करना नामुमकिन होगा। बुनियादी ढांचे के तहस-नहस होने का दावा करते हुए उन्होंने इसे अपनी रणनीति की जीत बताया। हालांकि, उनके परमाणु बम बनाने के दावों पर सवालिया निशान भी लग रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) ने पूर्व में कई बार स्पष्ट किया है कि उसे ऐसे कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं जिनसे यह साबित हो सके कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था। ऐसे में ट्रंप का यह बयान कूटनीतिक दबाव बनाने की एक कला भी माना जा रहा है।
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