Modi Xi Jinping Meeting: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों में सामान्य स्थिति की वापसी अलग बात है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन के प्रति मौजूदा रुख कई गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने कहा कि देश इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी भी जानना चाहता है।
जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंधों का सामान्य होना एक बात है, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से जो रुख देखने को मिला है, वह उनकी नजर में सोच-समझकर किया गया आत्मसमर्पण है। कांग्रेस नेता ने कहा कि बैठक खत्म होने के बाद भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूछे सवाल
कांग्रेस ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। इसमें जयराम रमेश की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे गए सवालों को प्रमुखता से रखा गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय शिखर बैठक समाप्त हो चुकी है और अब देश सरकार से उन मुद्दों पर जवाब चाहता है, जो लंबे समय से चर्चा में हैं।
पहला सवाल: 2020 के बयान पर कांग्रेस ने घेरा
जयराम रमेश ने पहला सवाल वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष और उसके बाद प्रधानमंत्री के बयान को लेकर उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या 19 जून 2020 को चीन को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया बयान भारत की स्थिति को कमजोर करने वाला नहीं था। उन्होंने गलवान घाटी में 15-16 जून 2020 की रात हुई झड़प का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें भारत के 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
गलवान के बाद दिए बयान पर मांगा जवाब
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गलवान की घटना के कुछ दिनों बाद सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि न तो कोई भारतीय सीमा में घुसा है और न ही कोई वहां मौजूद है। जयराम रमेश ने सवाल किया कि इस बयान को अब तक वापस क्यों नहीं लिया गया और क्या इसका असर बाद की भारत-चीन वार्ताओं में भारत की स्थिति पर नहीं पड़ा।
दूसरा सवाल: लद्दाख में पेट्रोलिंग अधिकारों का मुद्दा
कांग्रेस ने दूसरा बड़ा सवाल पूर्वी लद्दाख में भारत के पारंपरिक पेट्रोलिंग अधिकारों को लेकर उठाया। जयराम रमेश ने दावा किया कि लद्दाख के कई क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों और स्थानीय लोगों के पारंपरिक पेट्रोलिंग तथा चराई के अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि चीन को कथित क्षेत्रीय बढ़त मिलने की स्थिति क्यों बनी।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी कांग्रेस ने जताई चिंता
जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में भारतीय पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच को लेकर समस्याएं सामने आई हैं। साथ ही उन्होंने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने और क्षेत्र पर अपने दावे दोहराने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि इन गतिविधियों को लेकर सरकार को देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
ब्रह्मपुत्र पर चीन के बांध को लेकर चिंता
कांग्रेस नेता ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की प्रस्तावित बड़ी जलविद्युत परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा तिब्बत क्षेत्र में प्रस्तावित मेगा-डैम भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की जल सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। जयराम रमेश ने आशंका जताई कि ऐसी परियोजना से चीन को नदी के पानी पर रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
चार सवालों के जवाब का इंतजार
कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर सरकार की रणनीति पर स्पष्टता जरूरी है। पार्टी का कहना है कि सीमा सुरक्षा, पेट्रोलिंग अधिकार, अरुणाचल प्रदेश और चीन की जल परियोजनाओं जैसे मुद्दों पर देश को ठोस जवाब मिलना चाहिए। कांग्रेस ने इन्हीं सवालों के आधार पर केंद्र सरकार की चीन नीति पर फिर से बहस तेज कर दी है।
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