Asian Games 2026 : एशियन गेम्स 2026 में भारत के पहले पदक का इंतजार रविवार को भी खत्म नहीं हो सका। टेकबॉल की महिला सिंगल्स ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में भारत की क्विमसी डिसूजा को जापान की यूइना साकामोटो के खिलाफ करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। साकामोटो ने क्विमसी को दोनों सेटों में 12-11 के समान स्कोर से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया।
दोनों सेटों में एक-एक अंक से पिछड़ीं भारतीय खिलाड़ी
क्विमसी और साकामोटो के बीच खेला गया ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। दोनों सेटों में भारतीय खिलाड़ी ने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन निर्णायक मौकों पर जापानी खिलाड़ी एक-एक अंक की बढ़त हासिल करने में सफल रही। 12-11 और 12-11 के स्कोर ने मुकाबले की प्रतिस्पर्धा को साफ तौर पर दिखाया। इस हार के साथ क्विमसी महिला सिंगल्स में चौथे स्थान पर रहीं।
टूर्नामेंट में साकामोटो को पहले भी हरा चुकी थीं क्विमसी
दिलचस्प बात यह है कि क्विमसी ने इसी टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में साकामोटो को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। उन्होंने शुरुआती सेट गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए जापानी खिलाड़ी को 2-1 से मात दी थी। क्विमसी ने वह मुकाबला 10-12, 12-11 और 13-11 से जीता था। इसके बाद उन्होंने कंबोडिया की कोम्येन डीवाई को हराकर ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और सीधे सेमीफाइनल में जगह बनाई।
सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की इमा सुमाया से मिली थी हार
ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन के बाद क्विमसी का सामना सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की इमा सुमाया से हुआ। भारतीय खिलाड़ी ने मुकाबले की शुरुआत मजबूत अंदाज में की और पहला सेट 12-7 से अपने नाम किया। हालांकि, सुमाया ने अगले सेटों में वापसी करते हुए मुकाबला 2-1 से जीत लिया। निर्णायक सेट में उन्होंने 12-7 से जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया, जबकि क्विमसी को ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उतरना पड़ा।
टेकबॉल में भारत का ऐतिहासिक पदक जीतने का मौका था
एशियन गेम्स 2026 में टेकबॉल पहली बार शामिल किया गया है। ऐसे में क्विमसी के पास इस खेल में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स पदक जीतने का ऐतिहासिक अवसर था। सेमीफाइनल में हार के बाद भी उनके पास कांस्य पदक जीतने का मौका बचा था, लेकिन साकामोटो के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार के साथ यह उम्मीद भी समाप्त हो गई।
क्विमसी का अभियान फिर भी रहा शानदार
पदक से चूकने के बावजूद क्विमसी डिसूजा ने अपने एशियन गेम्स डेब्यू में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उन्होंने ग्रुप चरण में जापान की शीर्ष वरीयता प्राप्त साकामोटो को हराया और फिर कंबोडिया की खिलाड़ी के खिलाफ सीधे सेटों में जीत दर्ज की। ग्रुप में शीर्ष पर रहने के कारण उन्हें क्वार्टरफाइनल में बाई मिली थी। इस प्रदर्शन ने टेकबॉल में भारतीय चुनौती को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
मिक्स्ड डबल्स में भी भारत की चुनौती खत्म
क्विमसी डिसूजा ने मिक्स्ड डबल्स में मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ भारतीय जोड़ी का हिस्सा बनकर भी चुनौती पेश की। इस स्पर्धा में भारतीय जोड़ी ने फिलीपींस की जोड़ी को रिपेचेज मुकाबले में 2-0 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जगह बनाई थी। हालांकि, अंतिम पदक मुकाबले में भारत की जोड़ी को वियतनाम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जिससे टेकबॉल में भारत की पदक उम्मीदें समाप्त हो गईं।
टेकबॉल के जरिए भारत को मिली नई पहचान
टेकबॉल फुटबॉल और टेबल टेनिस के तत्वों से बना एक उभरता हुआ खेल है, जिसमें खिलाड़ी घुमावदार टेबल का इस्तेमाल करते हैं। एशियन गेम्स 2026 में इसके पदार्पण ने भारतीय खिलाड़ियों को इस खेल में बड़े मंच पर प्रदर्शन का अवसर दिया। क्विमसी का सेमीफाइनल तक पहुंचना और दो पदक मुकाबलों में खेलना भारत के लिए इस नई खेल विधा में महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुआ।
भारत के पहले पदक का इंतजार अब भी जारी
क्विमसी डिसूजा की दोनों पदक मुकाबलों में हार के बाद एशियन गेम्स 2026 में भारत के पहले पदक का इंतजार आगे बढ़ गया है। महिला सिंगल्स में कांस्य पदक से चूकने के बावजूद क्विमसी ने अपने प्रदर्शन से ध्यान खींचा। वहीं, टेकबॉल में भारत की भागीदारी ने देश में इस खेल को लेकर रुचि बढ़ाने का एक नया अवसर भी दिया है।
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