Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असम इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रहा है और यह मूल निवासियों के अस्तित्व की लड़ाई है।
मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केवल अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के हितों की चिंता है, जबकि वे असम के मूल निवासियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। सरमा ने कड़े लहजे में कहा कि “हजार गौरव गोगोई और राहुल गांधी भी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे,” क्योंकि वे राज्य के भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हालिया विवादों पर स्पष्टीकरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मिया’ शब्द उन्होंने नहीं गढ़ा है। उनके अनुसार, यह शब्द उन लोगों द्वारा स्वयं इस्तेमाल किया जाता है जो बांग्लादेश से आकर असम में बस गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस शब्द का उल्लेख स्वयं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में मिलता है, इसलिए इसे असंवैधानिक या अपमानजनक कहना गलत है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से सरमा ने चेतावनी दी कि अवैध प्रवासियों के कारण निचले असम के महत्वपूर्ण जिलों में जनसांख्यिकीय हमला हो रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यदि इन जिलों में मुस्लिम आबादी इसी तरह बढ़ती रही, तो भविष्य में इन क्षेत्रों का बांग्लादेश के साथ विलय करने की मांग उठ सकती है। यह स्थिति न केवल असम बल्कि पूरे भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि निचले असम पर नियंत्रण खो जाता है, तो पूरा उत्तर-पूर्वी भूभाग शेष भारत से कट जाएगा। इससे क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों पर राष्ट्र का अधिकार खत्म हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन चिंताओं को उठाना सांप्रदायिकता या नफरत फैलाना नहीं है, बल्कि राष्ट्रहित में उठाई गई एक जरूरी आवाज है।
हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कड़ी आपत्ति जताई है। गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक एजेंडे को सही ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि एक कार्यकारी रिपोर्ट की भाषा को अदालत की भाषा बताना न्यायपालिका का अपमान है और यह सीधे तौर पर ‘कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट’ का मामला बनता है।
विवाद की मुख्य जड़ मुख्यमंत्री का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के माध्यम से राज्य की मतदाता सूची से करीब 4 से 5 लाख ‘मिया’ मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे सीधे तौर पर इस समुदाय की अवैध घुसपैठ के खिलाफ हैं। उन्होंने जनता से भी इन प्रवासियों के प्रति सख्त रुख अपनाने का आह्वान किया था।
डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान सरमा ने कहा था कि आदर्श रूप से इन लोगों को असम के बजाय बांग्लादेश में मतदान करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की थी कि वे प्रवासियों को आर्थिक रूप से हतोत्साहित करें। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि यदि कोई रिक्शा किराया 5 रुपये मांगता है, तो उसे केवल 4 रुपये दें। उनका मानना है कि जब तक इन प्रवासियों के लिए परिस्थितियां कठिन नहीं होंगी, वे राज्य छोड़कर नहीं जाएंगे।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, 27 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट रोल में असम में कुल 2.51 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। इस प्रक्रिया के दौरान 4.78 लाख नाम मृत पाए गए, जबकि 5.23 लाख नाम स्थानांतरित हुए और 53,619 डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ मिलीं। अधिकारियों ने दावा किया है कि 61 लाख से अधिक घरों का भौतिक सत्यापन शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
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