Assam Violence
Assam Violence: असम के स्वायत्तशासी जिले कार्बी आंगलोंग में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन यह शांति सुकून वाली नहीं बल्कि खौफ की है। 22-23 दिसंबर को भड़की जातीय हिंसा ने 12 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र के दिलो-दिमाग पर गहरा जख्म छोड़ दिया है। बाजार पूरी तरह बंद हैं, सड़कों पर सन्नाटा है और संचार के लिए मोबाइल डेटा सेवाओं पर पाबंदी लगा दी गई है। हिंसा के बाद जिले के वेस्ट कार्बी आंगलोंग इलाके में लोग इस कदर डरे हुए हैं कि वे अपरिचितों से बात करने से भी कतरा रहे हैं। कई परिवारों ने बताया कि खौफ के मारे वे तीन दिनों से सो नहीं पाए हैं।
इस हिंसा में अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से एक घटना रूह कंपा देने वाली है, जहां खेरोनी घाट पर एक दिव्यांग युवक सूरज डे को उपद्रवियों की भीड़ ने उसकी दुकान के भीतर ही जिंदा जला दिया। सूरज के परिजनों का कहना है कि वे किसी तरह अपनी जान बचाकर दूसरे गांव भागे, लेकिन सूरज अपनी शारीरिक स्थिति के कारण वहां से निकल नहीं पाया। वहीं, दूसरी मौत पुलिस फायरिंग में हुई, जिसमें स्थानीय जनजाति के अथिक तिमुंग ने अपनी जान गंवाई। इस टकराव में 60 पुलिसकर्मियों सहित करीब 150 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हिंसा की मुख्य वजह ‘विलेज ग्रेजिंग रिजर्व’ (VGR) और ‘प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व’ (PGR) जमीनों पर कब्जा है। कार्बी जनजाति के संगठन पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उनकी मांग है कि आरक्षित चारागाहों और सरकारी जमीनों से अवैध रूप से बसे ‘बाहरी’ लोगों को हटाया जाए। कार्बी समुदाय का दावा है कि जिले में उनकी आबादी जो 1971 में 65% थी, वह अब घटकर महज 35% से 40% के बीच रह गई है। उनका आरोप है कि नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार से आए हिंदी भाषी लोगों ने उनकी आरक्षित जमीनों पर कब्जा कर लिया है और व्यापारिक व्यवस्था को अपने हाथों में ले लिया है।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए असम सरकार ने प्रशासन में बड़े फेरबदल किए हैं। अरण्यक सैकिया को नया डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर बनाया गया है, जबकि पश्चिम कार्बी आंगलोंग के एसपी फैज अहमद बरभुइया का तबादला कर नयन मोनी बर्मन को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान में जिले के प्रभावित 12 गांवों में असम पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), CRPF और भारतीय सेना के लगभग एक हजार जवान तैनात हैं। भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद स्थानीय लोगों में असुरक्षा का भाव बना हुआ है, विशेषकर उन इलाकों में जहां दोनों समुदाय आमने-सामने हैं।
कार्बी आंगलोंग भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत एक स्वायत्त क्षेत्र है, जहां जमीन के अधिकार आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 7184 बीघा से अधिक संरक्षित चारागाह जमीन पर विवाद है। कार्बी संगठनों का कहना है कि वे अपनी पहचान और अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ रहे हैं। सोमवार को जब पुलिस ने भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया, तो आक्रोश भड़क गया, जिसने बाद में हिंसक मोड़ ले लिया और दो समुदायों के बीच सीधी भिड़ंत हो गई।
मारे गए दिव्यांग सूरज के चाचा बकुल डे ने रोते हुए बताया कि उनके पास अब कुछ नहीं बचा। उनका घर जलकर राख हो चुका है और वे पुलिस के साये में सूरज के अवशेषों का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए। प्रभावित गांवों के लोग अब अपने घरों को लौटने से डर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक राजनीतिक समाधान नहीं निकलता और अवैध बसाहट का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक यह हिंसा की आग अंदर ही अंदर सुलगती रहेगी।
Read More: Sam Pitroda Exclusive: सैम पित्रोदा का बड़ा दावा,राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर दूतावास रखता है नजर
IPL 2026 CSK vs MI: आईपीएल 2026 के सबसे प्रतीक्षित मुकाबलों में से एक 'एल…
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो…
Jhansi Love Affair : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने…
Sarai Rohilla Murder : देश की राजधानी दिल्ली के सराय रोहिल्ला इलाके में शनिवार को…
Karanvir Bohra Journey : एकता कपूर के कालजयी धारावाहिक 'कसौटी जिंदगी की' से घर-घर में…
Odisha Bank Skeleton Case : ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष…
This website uses cookies.