Sam Pitroda Exclusive
Sam Pitroda Exclusive: ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावासों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार में पित्रोदा ने दावा किया कि जब भी राहुल गांधी विदेश दौरे पर होते हैं, तो भारतीय दूतावास के अधिकारी उन पर पैनी नजर रखते हैं। पित्रोदा के अनुसार, न केवल उनकी गतिविधियों की निगरानी की जाती है, बल्कि कई बार विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों को राहुल गांधी से न मिलने के लिए भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि होटल, एयरपोर्ट और बैठकों के दौरान उन्होंने खुद यह अनुभव किया है कि राहुल की जासूसी की जा रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इसके लिखित सबूत नहीं हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत अनुभव यही कहता है।
भाजपा द्वारा राहुल गांधी पर विदेश में जाकर भारत की छवि खराब करने के आरोपों को पित्रोदा ने पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि सच हर जगह एक ही रहता है, चाहे वह भारत की धरती पर बोला जाए या विदेश में। लोकतंत्र में ‘डबल स्टैंडर्ड’ नहीं हो सकते। पित्रोदा ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी वही बातें विदेश में कहते हैं जो वे भारत की जनता के बीच उठाते हैं। साथ ही, उन्होंने राहुल के जर्मनी दौरे की टाइमिंग पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं महीनों पहले तय होती हैं, इनका किसी समसामयिक विवाद से अचानक जुड़ाव नहीं होता।
जॉर्ज सोरोस और विदेशी ताकतों से कांग्रेस के संबंधों पर लगने वाले आरोपों को पित्रोदा ने ‘बकवास’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी का किसी भी राष्ट्रविरोधी नेटवर्क से कोई लेना-देना नहीं है। पित्रोदा ने कहा, “हम सार्वजनिक स्थानों और विश्वविद्यालयों में जाकर चर्चा करते हैं। वहां कौन आता है और किससे जुड़ा है, इससे हमें फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से भारतीय मूल्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति समर्पित है और विदेशी फंडिंग के दावे निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं।
सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) की जगह लाए गए नए कानून ‘जी-राम-जी’ पर पित्रोदा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि महात्मा गांधी के नाम से चल रही योजना में राम का नाम जोड़ने की क्या आवश्यकता थी? पित्रोदा के अनुसार, प्रधानमंत्री किसी एक धर्म या समुदाय के नहीं बल्कि पूरे देश के होते हैं। धर्म एक निजी आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन शासन और सरकारी योजनाओं में इसे प्राथमिकता बनाना उचित नहीं है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और नफरत के माहौल पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
पित्रोदा ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने पर चिंता जताई। उन्होंने ईवीएम (EVM), मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के बीच भरोसे की कमी आई है। इसके साथ ही, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने से पहले अपने पड़ोसियों जैसे नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान में स्थिरता लाने के लिए नेतृत्व दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता और पड़ोस में शांति भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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