Pakistan Taliban Ceasefire: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनावपूर्ण सीमा पर जारी भीषण संघर्ष आखिरकार अस्थायी रूप से थम गया है। बुधवार को अफगानिस्तान के तालिबान शासन ने यह घोषणा की कि पाकिस्तान की ओर से किए गए आग्रह और जोर के बाद उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं के बीच 48 घंटे के लिए अस्थायी सीजफायर (संघर्ष विराम) लागू करने का फैसला किया है।

पिछले कुछ दिनों से, खासकर स्पिन बोल्डक और कुर्रम ज़िले में, दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलाबारी और एयर स्ट्राइक की खबरें आ रही थीं, जिससे सीमा पर हालात युद्ध के कगार पर पहुँच गए थे। इस संघर्ष में कई तालिबानी लड़ाके मारे गए थे और दोनों पक्षों को नुकसान पहुँचा था।

पाक की गुहार पर सीजफायर
तालिबान शासन के सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमा पर लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा और उसने अफगानिस्तान के सामने सीजफायर के लिए औपचारिक रूप से गुहार लगाई। पाकिस्तान की तरफ से लगातार तनाव कम करने और बातचीत शुरू करने का आग्रह किया जा रहा था।
अफगानिस्तान की तरफ से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि यह सीजफायर पूरी तरह से अस्थायी है और पाकिस्तान के लगातार जोर देने पर ही लागू किया गया है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की सेना (जिसे ‘मुनीर आर्मी’ के नाम से भी संदर्भित किया जा रहा है) के लिए एक राजनीतिक और सैन्य झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसे अपने सीमावर्ती हितों की रक्षा के लिए अंततः तालिबान के सामने झुकना पड़ा है।
अस्थिर सीमा और तनाव की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर पुराना विवाद है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान की धरती से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकवादी समूहों के लगातार हमलों से परेशान है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान (तालिबान) का आरोप है कि पाकिस्तान सीमा पर एकतरफा कार्रवाई कर रहा है और अफगान इलाकों पर हमले कर रहा है।
पिछले दिनों दोनों सेनाओं के बीच हुई भीषण झड़पों में 12 तालिबानी लड़ाकों के मारे जाने की खबर थी, जिसके बाद अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया।
सीजफायर का आगे का रास्ता
यह 48 घंटे का संघर्ष विराम दोनों पक्षों को तनाव कम करने और कूटनीतिक बातचीत शुरू करने का मौका देगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस सीजफायर की अवधि में दोनों देश सीमा विवाद, TTP के मुद्दे और आतंकवादियों को सौंपने जैसी अफगानिस्तान की मांगों पर किस तरह से बातचीत करते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक सीमा विवाद का कोई स्थायी राजनीतिक हल नहीं निकलता, तब तक यह अस्थायी शांति कभी भी टूट सकती है और सीमा पर तनाव बना रहेगा।
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