CJI Gavai Shoe Attack: देश की सर्वोच्च न्यायपालिका में सोमवार, 6 अक्टूबर को ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) गवई की बेंच में कार्यवाही के दौरान CJI बीआर गवई पर एक वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि समय रहते सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को काबू में कर लिया और आरोपी वकील राकेश किशोर को हिरासत में ले लिया गया।

घटना के दौरान आरोपी वकील ने “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे भी लगाए, जिससे साफ हुआ कि हमला किसी धार्मिक उन्माद से प्रेरित था। घटना के बाद CJI गवई ने संयम का परिचय देते हुए अदालत की कार्यवाही जारी रखने का आग्रह किया और कहा “हम इससे विचलित नहीं होंगे। कृपया आप अपनी दलीलें जारी रखें।”

सोनिया गांधी ने कहा – सिर्फ CJI नहीं, संविधान पर हमला
इस निंदनीय घटना पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे भारत के संविधान पर सीधा हमला करार देते हुए कहा “भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश पर सुप्रीम कोर्ट में हुआ हमला न केवल उन पर, बल्कि हमारे संविधान पर हमला है। देश को इस गंभीर क्षण में एकजुट होकर न्यायपालिका के साथ खड़ा होना चाहिए।”
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह कट्टरता और असहिष्णुता का प्रतीक है। उन्होंने ट्वीट किया,“CJI पर हुआ हमला शर्मनाक और विधि के शासन पर हमला है। यह घटना दर्शाती है कि नफरत और कट्टरता ने हमारे समाज को किस हद तक प्रभावित कर दिया है।”खरगे ने यह भी कहा कि न्याय की रक्षा करने वाले व्यक्ति को डराने और अपमानित करने की कोशिश हमारे लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने घटना को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“यह कोई धार्मिक कट्टरता नहीं, बल्कि पागलपन है। देश को इस कगार पर पहुंचाने के लिए केवल एक व्यक्ति जिम्मेदार है – नरेंद्र मोदी।”
उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सर्वोच्च न्यायालय भी अब असहिष्णुता और उग्रता की आग से अछूता नहीं रहा।
क्या कहता है कानून?
घटना के बाद आरोपी वकील राकेश किशोर को हिरासत में लिया गया है और सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट परिसर में प्रवेश के समय सुरक्षा जांच के बावजूद, एक व्यक्ति द्वारा जूता फेंकने की कोशिश गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था में चीफ जस्टिस पर हमला होना न केवल न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह लोकतंत्र के स्तंभों को कमजोर करने की कोशिश भी है। नेताओं, समाज और नागरिकों को इस प्रकार की घटनाओं की एक स्वर में निंदा करनी चाहिए ताकि संविधान और न्याय प्रणाली की सुरक्षा बनी रहे।











