India-Australia Heritage: ऑस्ट्रेलिया लौटाएगा भारत की दुर्लभ मूर्तियां, भद्रकाली, नंदी और कार्तिकेय की होगी वापसी

भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर स्वदेश लौटने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भद्रकाली, नंदी और कार्तिकेय की दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाओं को भारत वापस करने का फैसला किया है। इन मूर्तियों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। आखिर ये प्रतिमाएं विदेश कैसे पहुंचीं, उनकी वापसी कैसे संभव हुई और भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

India-Australia Heritage: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों में एक नया और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया सरकार भारत की तीन अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन धार्मिक कलाकृतियां भारत को वापस लौटा रही है। इन धरोहरों में देवी भद्रकाली का धातु निर्मित त्रिशूल, नंदी की पत्थर से बनी प्रतिमा और षणमुख कार्तिकेय की एक दुर्लभ मूर्ति शामिल है। यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक सहयोग का प्रतीक है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने स्वयं इन धरोहरों को भारत को सौंपने की घोषणा की, जो वहां की नेशनल गैलरी और न्यू साउथ वेल्स की आर्ट गैलरी के संग्रह में संरक्षित थीं।

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प्रधानमंत्री मोदी और अल्बनीज के बीच ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन

इस घोषणा के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में उपस्थित थे। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री अल्बनीज की मेजबानी में आयोजित तीसरे ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया सालाना शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लिया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत के दौरान न केवल इन सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी का स्वागत किया, बल्कि भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के छह वर्षों की सफल यात्रा पर भी संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी और अल्बनीज के बीच हुई आमने-सामने की इस वार्ता ने दोनों देशों के भविष्य के संबंधों को और अधिक दिशा और मजबूती प्रदान की है।

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सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह पहल भारत के साथ सांस्कृतिक सहयोग को गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बयान के अनुसार, “इन सांस्कृतिक धरोहरों की स्वैच्छिक वापसी सांस्कृतिक विरासत के नैतिक संग्रहण और संग्रहों के सर्वोत्तम प्रबंधन के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाने की ऑस्ट्रेलिया की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।” यह कदम न केवल भारत के प्रति ऑस्ट्रेलिया के सम्मान को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि विश्व के विभिन्न संग्रहालयों में रखी सांस्कृतिक संपत्तियों का प्रबंधन अब अधिक पारदर्शी और नैतिक मानकों पर आधारित हो।

आपसी समझ और साझा भविष्य का मजबूत होता आधार

विदेश मंत्रालय के बयान में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सांस्कृतिक आदान-प्रदान आपसी समझ और मानवीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मोदी और अल्बनीज ने इस बात को स्वीकार किया कि कला और इतिहास के माध्यम से दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की संस्कृति को बेहतर समझ रहे हैं। भारत की प्राचीन धरोहरों की वापसी महज एक कूटनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि यह दोनों देशों के बीच की बढ़ती आत्मीयता का प्रमाण है। यह साझा प्रयास आने वाले समय में न केवल कलात्मक साझेदारी को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को और भी अधिक सुदृढ़ और जीवंत बनाएगा।

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Chandan Das

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