Bob Simpson death : ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के महान खिलाड़ी और कोच बॉब सिम्पसन का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की। उनके जाने से क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

वर्ल्ड कप विजेता कोच और धाकड़ बल्लेबाज
सिम्पसन ने 1987 में ऑस्ट्रेलिया को पहला वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। खिलाड़ी रहते हुए उन्होंने एक टेस्ट मैच में 13 घंटे से ज्यादा समय तक बल्लेबाजी कर तिहरा शतक जमाया था। उनकी 311 रनों की पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की यादगार पारी मानी जाती है।


1957 से 1978 तक का शानदार करियर
बॉब सिम्पसन ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से 1957 से 1978 तक 62 टेस्ट और दो वनडे मैच खेले। उन्होंने इस दौरान 4869 रन बनाए और 71 विकेट भी चटकाए। कप्तान के तौर पर उन्होंने 39 टेस्ट में टीम का नेतृत्व किया, जिनमें से 12 मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने जीत दर्ज की।
तिहरे शतक लगाने वाले पहले टेस्ट कप्तान
1964 में सिम्पसन ने इंग्लैंड के ओवल मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक जमाया और उसे ट्रिपल सेंचुरी में बदल दिया। इस तरह वे तिहरा शतक लगाने वाले पहले टेस्ट कप्तान बने। उस समय उन्होंने सात साल के शतक के सूखे को भी खत्म किया था।
41 साल की उम्र में टीम में वापसी
सिम्पसन ने 1968 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन 1977 में वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट विवाद के चलते ऑस्ट्रेलियाई टीम कमजोर पड़ गई। ऐसे में 41 साल की उम्र में उन्हें फिर से टीम में शामिल किया गया। वापसी के बाद उन्होंने 10 टेस्ट खेले और दो शतक भी लगाए। उस दौरान उनका औसत 52.83 और 32.38 रहा।
61 साल बाद टूटा उनका रिकॉर्ड
टेस्ट मैच में 300 रन बनाने वाले सबसे कम उम्र के कप्तान का रिकॉर्ड सिम्पसन के नाम था, जो 61 साल तक कायम रहा। जुलाई 2025 में दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ कप्तानी करते हुए तिहरा शतक जड़कर उनका रिकॉर्ड तोड़ा।
कोच बनकर दिलाया पहला वर्ल्ड कप
1978 में रिटायरमेंट के बाद सिम्पसन को 1986 में ऑस्ट्रेलियाई टीम का कोच बनाया गया। उनके नेतृत्व में टीम ने 1987 में पहली बार वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा 1995 में 17 साल बाद फ्रैंक वॉरेल ट्रॉफी जीती और 4 एशेज सीरीज पर कब्जा किया। 1996 में वे सेलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष भी बने।

भारत और राजस्थान क्रिकेट में भी निभाई भूमिका
सिम्पसन ने 1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के सलाहकार के रूप में भी काम किया। इसके अलावा 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने राजस्थान क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी में मार्गदर्शन दिया।
शोक संदेश और श्रद्धांजलि
उनके निधन पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने शोक जताते हुए उन्हें क्रिकेट का सच्चा सेवक बताया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सिम्पसन एक खिलाड़ी, कप्तान, कोच और चयनकर्ता के रूप में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की मजबूत पहचान थे।
बॉब सिम्पसन की उपलब्धियां
1965: विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर
1978: ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया (एएम)
1985: स्पोर्ट ऑस्ट्रेलिया हॉल ऑफ फेम
2000: ऑस्ट्रेलियाई खेल पदक
2001: शताब्दी पदक
2006: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट हॉल ऑफ फेम
2007: ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अधिकारी
2013: आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम
बॉब सिम्पसन का योगदान ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट के लिए अमूल्य रहा है। उनका जाना क्रिकेट जगत के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनकी उपलब्धियां और विरासत हमेशा याद की जाएंगी।










