Iran News: अयातुल्ला खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक, अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे मोजतबा, चर्चा तेज

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे। समारोह के दौरान कई राजनीतिक संदेश वाले पोस्टर भी दिखाई दिए, जबकि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आखिर अंतिम संस्कार में क्या-क्या हुआ और किन बातों ने सबसे अधिक ध्यान खींचा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Iran News: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को गुरुवार को मशहद स्थित पवित्र इमाम रजा दरगाह परिसर में अंतिम विदाई दी गई। एक भीषण हमले में जान गंवाने के कुछ दिनों बाद, उनके पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ दफनाया गया। इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार के मौके पर मशहद शहर में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। दरगाह के सुनहरे गुंबद और ऊंची मीनारों के साये में हजारों शोक संतप्त समर्थकों ने अपने नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। लोग हाथों में ईरान के झंडे, खामेनेई की तस्वीरें और क्रांतिकारी नारों वाले पोस्टर लिए हुए थे। यह आयोजन न केवल उनके 37 वर्षों के शासनकाल का समापन है, बल्कि ईरान के लिए एक अत्यंत नाजुक और चुनौतीपूर्ण मोड़ भी है।

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मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति और स्वास्थ्य पर अटकलें

अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है, लेकिन उनकी अनुपस्थिति पूरे देश के लिए रहस्य का विषय बनी हुई है। जिस हमले में अली खामेनेई की जान गई, उसी में मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके चेहरे और अंगों पर गहरी चोटें आई हैं, जिसके कारण वे अभी सार्वजनिक रूप से सामने आने में असमर्थ हैं। तेहरान के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वे उपचार के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें अभी सार्वजनिक प्रदर्शनों से दूर रखा गया है। उन्होंने केवल लिखित बयान जारी किए हैं, जिससे उनकी स्थिति को लेकर चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म है।

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‘अमेरिका की मौत’ और ‘ट्रंप को मार डालो’ के नारों से गूंजा मशहद

अंतिम संस्कार के जुलूस के दौरान ईरानियों का आक्रोश स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। भीड़ में शामिल लोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ प्रतिशोध की आग में जलते दिखे। दरगाह की ओर जाने वाली सड़कों पर उमड़ी भीड़ ‘अमेरिका की मौत’ जैसे क्रांतिकारी नारों के साथ-साथ ‘ट्रंप को मार डालो’ और ‘ट्रंप के खून की कसम’ जैसे नारे लगा रही थी। हाथों में ऐसे प्लेकार्ड थे जिन पर ट्रंप को सीधे निशाना बनाया गया था। जुलाई की भीषण गर्मी के बीच, शोक मनाने वालों के लिए प्रशासन द्वारा पानी की बौछारें की गईं। यह दृश्य ईरान की उस गहरी धार्मिक और राजनीतिक परंपरा को दर्शाता है, जहाँ शहादत को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है।

बदलते ईरान के सामने बड़ी चुनौतियां और अनिश्चित भविष्य

अली खामेनेई का दफन तेहरान, क़ोम, नज़फ और कर्बला की धार्मिक यात्राओं के बाद संपन्न हुआ, जिसने ईरान की शिया विचारधारा और इस्लामिक रिपब्लिक की ताकत को प्रदर्शित करने की कोशिश की। हालांकि, अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव और देश के भीतर मौजूद आर्थिक व राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह अंतिम संस्कार एक नए दौर की आहट है। खामेनेई के चार दशकों के शासन के अंत के साथ, अब ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे अपने आंतरिक अस्तित्व और विदेशी दुश्मनों के खतरों के बीच संतुलन बनाना होगा। मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान अपना भविष्य कैसे संवारता है, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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