UP Politics : रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रशासन द्वारा जारी बुलडोजर एक्शन के नोटिस ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा को साम्प्रदायिक चश्मे से देखने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, शिक्षक, छात्र और उनके रोजगार का मुद्दा भाजपा के एजेंडे में कहीं भी शामिल नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को हर चीज में केवल साम्प्रदायिकता ही नजर आती है, जो राज्य की शैक्षिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।

‘अनरजिस्टर्ड’ संगठनों पर निशाना: अवैधानिक भवनों के ध्वस्तीकरण का सवाल
अखिलेश यादव ने इस मामले में बिना नाम लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि भाजपा के ‘अनरजिस्टर्ड’ संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों और कार्यालयों को कब ढहाया जाएगा? उन्होंने तर्क दिया कि यदि संगठन ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थान कैसे वैध हो सकते हैं? पूर्व मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई को पूरी तरह निंदनीय करार देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया है।

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद के तीखे सवाल
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के नक्शा पास होने की जानकारी मांगी है। चांद ने लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और केजीएमयू (KGMU) का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या इन सभी संस्थानों के नक्शे नियमानुसार पास हैं? सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि आजम खान का नाम जुड़ते ही सरकार को सारे नियम-कानून याद आ जाते हैं, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान सरकार का जाना तय है और बदलाव का समय आ गया है।
जौहर यूनिवर्सिटी का मामला: 15 दिन का मिला मोहलत
उल्लेखनीय है कि 15 जुलाई को रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्यों को अवैध करार देते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आधिकारिक नोटिस जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में अपना पक्ष रखने और आवश्यक कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. तजीन फातिमा ने इस नोटिस की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें 15 दिनों का अवसर दिया है। यह पूरा मामला रामपुर की राजनीति में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है, जहाँ एक ओर प्रशासन इसे नियमों का उल्लंघन बता रहा है, तो वहीं समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई करार दे रही है।












