Baba Ramdev : प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “जो भारत को भारत बनाने में योगदान नहीं देता, वह सनातन धर्म का गुरु नहीं हो सकता।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ प्रवचन देना ही किसी को सनातन धर्म का प्रतिनिधि नहीं बना देता। जब तक कोई व्यक्ति समाज, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था में योगदान नहीं देता, तब तक उसे गुरु कहना बंद कर देना चाहिए।

बाबा रामदेव ने कहा जहां उनसे कथावाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयानों को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा, “जीवन में चरित्र, पवित्रता और पुरुषार्थ होना चाहिए। सनातन धर्म का असली गुरु वही है जो समाज को आगे बढ़ाने में वास्तविक योगदान देता हो।”

‘प्रवचन के नाम पर चल रही प्रवंचना’
रामदेव ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि कई कथावाचक अब प्रवचन के नाम पर सिर्फ “प्रवंचना” कर रहे हैं। वे शास्त्रों की गलत व्याख्या कर जनमानस को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे प्रवचनों में ना तथ्य होता है, ना विज्ञान और ना ही सच्चाई। सनातन धर्म का यह अपमान है और इसे रोकना जरूरी है।”
अनिरुद्धाचार्य के बयान पर कड़ी आपत्ति
हाल ही में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा महिलाओं के चरित्र को लेकर दिए गए बयान पर टिप्पणी करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, “ओछी बातें करना खुद में ओछापन है। किसी भी वर्ग, विशेषकर महिलाओं को निशाना बनाना एक सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कहा कि आचरण सभी में होना चाहिए, चाहे वह पुरुष हो या महिला – यही हमारे परिवार और संस्कृति की नींव है।
‘गुरु’ पद की गरिमा बनाए रखने की अपील
बाबा रामदेव ने अन्य संतों और गुरुओं से भी अपील की कि वे संयम और विवेक के साथ वाणी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा, “जिनके नाम के आगे ‘सद्गुरु’ या ‘शंकराचार्य’ जैसे शब्द जुड़ते हैं, उन्हें अत्यधिक जिम्मेदारी के साथ आचरण करना चाहिए। गिरते स्तर की बातें न केवल उनकी प्रतिष्ठा को, बल्कि पूरे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।”
अमेरिका-भारत टैक्स विवाद पर भी रखी राय
बाबा रामदेव ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैक्स टैरिफ को लेकर कहा कि ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका में स्थानीय प्रोडक्शन बढ़े, लेकिन ऐसा वहां संभव नहीं है क्योंकि अमेरिका की कार्य संस्कृति में आलस्य, महंगी मजदूरी और रिसोर्स की कमी बड़ी बाधा हैं। रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति पर कथावाचकों के बयान लगातार विवादों में हैं। ऐसे में बाबा रामदेव का स्पष्ट और दृढ़ रुख इस दिशा में एक अहम संदेश है कि सनातन धर्म की गरिमा बनाए रखने के लिए जिम्मेदारियों का निर्वहन भी जरूरी है, केवल ज्ञान बांटने से कोई गुरु नहीं बनता।










