Sexual Harassment Teacher: छात्राओं से यौन उत्पीड़न के दोषी शिक्षक को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत,  कहा – यह सिर्फ कदाचार नहीं, गंभीर अपराध है

Sexual Harassment Teacher:  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छात्राओं के साथ यौन शोषण और अभद्र व्यवहार के दोषी शिक्षक की अपील खारिज करते हुए साफ किया कि “स्कूल टीचर का पद सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है।” हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि “नाबालिग छात्राओं के साथ यौन, अपमानजनक या शोषणकारी कृत्य केवल प्रोफेशनल मिसकंडक्ट नहीं, बल्कि POCSO एक्ट के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है।”

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क्या है मामला?

यह मामला मुंगेली जिले के बरेला शासकीय स्कूल का है, जहां कीर्ति कुमार शर्मा नामक शिक्षक गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त था। लेकिन वह बिना अनुमति के कक्षा 7वीं में जाकर विज्ञान पढ़ाता था। इसी दौरान छात्राओं ने उसके खिलाफ “बैड-टच” और अभद्र टिप्पणियों की शिकायत की थी।

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छात्राओं की शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने बीईओ प्रतिभा मंडलोई से जांच कराई। जांच में यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी शिक्षक छात्राओं के शरीर के विभिन्न हिस्सों को अनुचित तरीके से छूता था, जिसमें रीढ़ और छाती जैसे संवेदनशील अंग शामिल थे। इसके अलावा, वह स्कूल में गुटखा और गुड़ाखू का सेवन भी करता था।

POCSO कोर्ट ने सुनाई थी सजा

जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की और चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। मुंगेली स्थित फास्ट ट्रैक POCSO कोर्ट ने 2 मार्च 2022 को शिक्षक कीर्ति शर्मा को 2 साल 2 महीने और 6 दिन की सजा सुनाई थी, साथ ही जुर्माना भी लगाया गया।

हाईकोर्ट में की गई अपील खारिज

सजा के खिलाफ आरोपी शिक्षक ने हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए दावा किया कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है और ट्रायल कोर्ट का फैसला त्रुटिपूर्ण है। लेकिन हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा, “छात्राओं की गवाही स्पष्ट और भरोसेमंद है। शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण करें, न कि उनका शोषण करें। ऐसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की नींव को हिला देती हैं।”

न्याय व्यवस्था का मजबूत संदेश

यह फैसला न्यायिक व्यवस्था की ओर से एक कड़ा संदेश है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही यह निर्णय POCSO एक्ट के तहत मामलों की गंभीरता और पीड़ितों की गवाही की अहमियत को भी दर्शाता है।

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