Balrampur MNREGA Scam: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। जनपद पंचायत वाड्रफनगर में वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान हुए बहुचर्चित मनरेगा घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक, तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रवण कुमार मरकाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब 30 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि के गबन का यह मामला पिछले कई वर्षों से सुर्खियों में था। आरोपी अधिकारी गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय से फरार चल रहा था, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने आखिरकार उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

घोटाले की परतें: 2020 में हुआ था सनसनीखेज खुलासा
इस भ्रष्टाचार कांड का आधिकारिक खुलासा वर्ष 2020 में हुआ था। जनपद पंचायत वाड्रफनगर द्वारा 30 अप्रैल 2020 को थाना बसंतपुर में एक विस्तृत जांच रिपोर्ट और महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे गए थे। जांच के दौरान यह पाया गया कि ग्राम पंचायत तुगंवा, गुडरू, जमई और पेण्डारी में विकास कार्यों के नाम पर भारी अनियमितता बरती गई है। मुरुम मिट्टी की आपूर्ति, सड़क निर्माण, पुलिया, तटबंध और डब्ल्यूबीएम (WBM) निर्माण जैसे कार्यों के लिए फर्जी बिल तैयार किए गए और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम: अंबिकापुर से धराया मुख्य आरोपी
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी श्रवण कुमार मरकाम उर्फ एस.के. मरकाम (62 वर्ष) को हिरासत में लिया। वह अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र के महुआपारा का निवासी है। पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में आरोपी मरकाम ने फर्जीवाड़े की बात स्वीकार कर ली। उसने स्वीकार किया कि पद पर रहते हुए उसने नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया था। जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इस गिरफ्तारी को स्थानीय प्रशासन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
साठगांठ का पर्दाफाश: सप्लायर और रोजगार सहायक भी शामिल
विवेचना के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह घोटाला केवल एक व्यक्ति की करतूत नहीं थी, बल्कि इसमें अधिकारियों और सप्लायरों का एक पूरा नेटवर्क शामिल था। मामले में पहले ही मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी अश्विनी कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया जा चुका है। तिवारी ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि उसने तत्कालीन सीईओ मरकाम और अन्य साथियों के साथ मिलकर कुल 30,02,449 रुपये का गबन किया। इसके अलावा, अवैध लाभ पहुँचाने वाले सप्लायर हरिहर यादव, कुजलाल साहू और भ्रष्टाचार में मददगार रहे रोजगार सहायक गिरीश यादव को भी पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
कानूनी प्रक्रिया तेज: पूरक चालान पेश, अन्य की तलाश जारी
पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) वाड्रफनगर के नेतृत्व में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। संबंधित कर्मचारियों और सप्लायरों के बयान धारा 164 के तहत न्यायालय में दर्ज कराए जा चुके हैं। पुलिस ने इस घोटाले से जुड़े पूरक चालान भी कोर्ट में पेश कर दिए हैं। हालांकि मुख्य आरोपी गिरफ्त में आ चुका है, लेकिन पुलिस का कहना है कि मामले में संलिप्त कुछ अन्य संदिग्ध अब भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी और पतासाजी की जा रही है।
शून्य सहिष्णुता की नीति: दोषियों को नहीं बख्शेगी पुलिस
बलरामपुर पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शासकीय धन का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। 2014-15 का यह मामला छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान था, जिसका पटाक्षेप अब गिरफ्तारियों के साथ हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है, क्योंकि मनरेगा की यह राशि उनके गांव के विकास और रोजगार के लिए थी, जिसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया था।


















