Bangladesh Politics : बांग्लादेश की राजनीति में हाल के दिनों में भारत के खिलाफ बयानबाजी ने एक नया मोड़ ले लिया है। ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल को लेकर भारत पर निशाना साधा जा रहा है। इसी क्रम में, नेशनल सिटीजन पार्टी के सांसद नाहिद इस्लाम ने रविवार (28 जून) को संसद में बजट सत्र के दौरान भारत से माफी की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि नई दिल्ली को बांग्लादेश के सामने उस 16 साल पुरानी अवामी लीग सरकार के समर्थन के लिए माफी मांगनी चाहिए, जिसे वे ‘अत्याचारी’ करार दे रहे हैं। सांसद के इस बयान ने राजनयिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

उच्चायुक्त के दौरे पर सवाल और अतीत की कड़वाहट
सांसद नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश में भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के हालिया दौरे पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। संसद में उन्होंने कहा कि उच्चायुक्त ने साझा संस्कृति और भाईचारे की जो बातें की हैं, वे महज दिखावा हैं। इस्लाम का कहना है कि भारत को मीठी-मीठी बातों के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए था कि वे आने वाले समय में सम्मान और समानता के आधार पर ढाका के साथ अपने संबंधों को किस प्रकार पुनर्गठित करना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के लोग पिछले 16 वर्षों के घटनाक्रम को भूले नहीं हैं, जब भारत ने अवामी लीग सरकार को प्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया था।

सीमा पर हिंसा और मानवाधिकार के गंभीर आरोप
सांसद नाहिद इस्लाम ने केवल राजनीतिक समर्थन तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने सीमा सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि बॉर्डर पर अब तक 10 बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या की गई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की ओर से बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध घोषित कर उन्हें जबरन वापस धकेलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों को भारत में पनाह देने का मुद्दा उठाते हुए पड़ोसी देश की नीतियों पर उंगली उठाई। इन आरोपों ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे तनावपूर्ण वातावरण को और अधिक जटिल बना दिया है।
तारिक रहमान की सरकार और ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति
संसद में नाहिद इस्लाम ने अपनी सरकार, जिसका नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, की ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को मजबूती से रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सरकार की यह नीति केवल कागजों या भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके ठोस परिणाम दिखने चाहिए। सांसद ने जोर दिया कि विदेश नीति को संचालित करना और पड़ोसी देशों के साथ सम्मानजनक व बराबरी के रिश्ते कायम करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। नाहिद इस्लाम के ये तेवर यह दर्शाते हैं कि बांग्लादेश का राजनीतिक नेतृत्व अब अपनी संप्रभुता और विदेश नीति को लेकर अधिक मुखर हो रहा है, जो आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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