Gayeshwar Chandra Roy
Gayeshwar Chandra Roy: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी निगाहें नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल के चेहरों पर टिकी हैं। बीएनपी (BNP) के नेतृत्व वाली इस नई व्यवस्था में समावेशी राजनीति का चेहरा दिखाने के लिए अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को विशेष प्रतिनिधित्व देने की तैयारी चल रही है। चर्चा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रभावशाली हिंदू चेहरा गोयेश्वर चंद्र रॉय को तारिक रहमान की कैबिनेट में एक महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि उनकी सरकार सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि देश के संतुलित विकास के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी अनिवार्य है। हिंदू समुदाय से गोयेश्वर चंद्र रॉय का नाम सबसे आगे है क्योंकि वे इस बार बीएनपी के टिकट पर संसद पहुँचने वाले दो हिंदू सांसदों में से एक हैं। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करना न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का एक सकारात्मक संदेश देगा।
गोयेश्वर चंद्र रॉय बीएनपी के कोई नए नाम नहीं हैं; वे 1978 से पार्टी के प्रति समर्पित रहे हैं। वर्तमान में वे बीएनपी की नीति-निर्माण समिति (Standing Committee) के प्रमुख सदस्यों में से एक हैं। शेख हसीना के लंबे शासनकाल के दौरान जब खालिदा जिया और उनकी पार्टी कठिन दौर से गुजर रही थी, तब भी गोयेश्वर ने डटकर मुकाबला किया और पार्टी का झंडा बुलंद रखा। ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले रॉय पहले भी मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिससे उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कोई कमी नहीं है।
इस चुनाव में गोयेश्वर चंद्र रॉय की स्थिति न केवल उनकी अपनी जीत से बल्कि उनके समधी नितॉय रॉय चौधरी की जीत से भी मजबूत हुई है। नितॉय रॉय चौधरी भी बीएनपी के टिकट पर संसद पहुँचे हैं। एक ही परिवार से दो सांसदों के आने के बाद पार्टी के भीतर गोयेश्वर का प्रभाव और अधिक बढ़ गया है। माना जा रहा है कि राजनीतिक अनुभव और सामुदायिक पकड़ को देखते हुए तारिक रहमान उन्हें कैबिनेट में जगह देने के लिए पूरी तरह सहमत हैं।
बांग्लादेश की कुल आबादी में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है। ऐतिहासिक रूप से, वहां की सरकारों ने अपनी छवि को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखने के लिए कैबिनेट में कम से कम दो हिंदू मंत्रियों को जगह दी है। शेख हसीना की सरकार में भी यह परंपरा रही। यहाँ तक कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में भी बिधान चंद्र पोद्दार को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। अब तारिक रहमान इस परंपरा को आगे बढ़ाकर हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते हैं।
‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिक रहमान की नई कैबिनेट में लगभग 40 सदस्यों को शामिल किया जा सकता है। इसमें अनुभव और ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। संभावित मंत्रियों की सूची में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, सलाहुद्दीन चौधरी, मिर्जा अब्बास और अब्दुल मोईन खान जैसे पुराने दिग्गजों के नाम तय माने जा रहे हैं। ये सभी नेता पूर्व में खालिदा जिया की सरकार में मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं।
नई कैबिनेट में महिलाओं और युवाओं को भी प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। चर्चा है कि फरीदपुर-2 से शमा उबैद, मानिकगंज-3 से अफरोजा खानम रीता और नटोर-1 से फरजाना शर्मिन पुतुल जैसे नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है। तारिक रहमान का लक्ष्य एक ऐसी कैबिनेट तैयार करना है जो न केवल अनुभवी हो बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक दृष्टिकोण भी रखती हो।
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