बांग्लादेश में राम मूर्ति विवाद ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया है। आखिर विवाद की जड़ क्या है, प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं और प्रशासन अब कौन सा बड़ा फैसला लेने जा रहा है?
बांग्लादेश में राम मूर्ति विवाद ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया है। आखिर विवाद की जड़ क्या है, प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं और प्रशासन अब कौन सा बड़ा फैसला लेने जा रहा है?

Bangladesh Hindu Protest : बांग्लादेश में भगवान राम की एक भव्य प्रतिमा के निर्माण को लेकर उपजा विवाद अब बड़े सांप्रदायिक तनाव में तब्दील हो गया है। मामला तब बिगड़ा जब रंगपुर में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों ने मूर्ति निर्माण का विरोध करते हुए भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया। इस घटना के बाद ढाका सहित देश के कई हिस्सों में हिंदू समुदाय ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। राजधानी ढाका के मुख्य शाहबाग चौराहे से लेकर नेशनल प्रेस क्लब तक हजारों हिंदुओं और छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला और ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

यह पूरा संकट तब शुरू हुआ जब गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में निर्माणाधीन 81 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा पर कट्टरपंथी समूहों ने आपत्ति जताई। ‘श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति’ का दावा है कि इस्लामी संगठनों से मिली धमकियों के बाद स्थानीय अधिकारियों ने परियोजना को जबरन रुकवा दिया है। इस मूर्ति का निर्माण मंदिर परिसर के विस्तार का हिस्सा है, जिस पर लगभग 22 करोड़ टका खर्च किए जा रहे हैं। इसमें भगवान राम के साथ 50 फुट ऊंची कृष्ण और 30 फुट ऊंची शिव प्रतिमाएं भी शामिल हैं। काम का 80 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका था, लेकिन इस्लामी समर्थकों द्वारा मूर्ति गिराने की धमकियों के बाद से निर्माण कार्य ठप पड़ा है।

प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की सरकार, विशेषकर तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार पर कार्रवाई न करने और तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। हिंदू महाजोत सहित कई संगठनों ने पुलिस द्वारा प्रदर्शन रोकने के प्रयासों के बीच भी अपना संघर्ष जारी रखा है। उन्होंने प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे। हिंदू संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि पलाशबाड़ी में मूर्ति निर्माण की अनुमति नहीं मिली, तो वे पूरे बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके राम मंदिर का निर्माण करेंगे।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से मार्च के बीच ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो उनकी सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि बांग्लादेश में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत दिखाई दे रही है। राम मंदिर के अपमान की घटना और कट्टरपंथियों की बढ़ती धमकियों ने न केवल हिंदू समुदाय को सड़कों पर आने के लिए मजबूर किया है, बल्कि देश में धार्मिक सद्भाव के भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
अब स्थिति यह है कि हिंदू समुदाय शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात रखने जा रहा है। नेशनल प्रेस क्लब के सामने बनी ‘ह्यूमन चैन’ और ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के पास हुए प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। क्या सरकार कट्टरपंथी तत्वों पर लगाम लगाकर अल्पसंख्यकों का भरोसा जीत पाएगी या यह विवाद और अधिक गहराएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, पूरे देश में अल्पसंख्यकों के भीतर व्याप्त असुरक्षा की भावना को शांत करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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