छत्तीसगढ़

Bastar Encounter: नक्सली पापाराव के खात्मे का दावा, बस्तर में संगठन के अंत की उलटी गिनती शुरू

Bastar Encounter: छत्तीसगढ़ के बीजापुर-महाराष्ट्र सीमा पर हुई हालिया मुठभेड़ के बाद नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। तेलंगाना भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर दावा किया है कि खूंखार नक्सली पापाराव मुठभेड़ में मारा गया है। हालांकि, बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने स्पष्ट किया है कि मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें 4 महिलाएं शामिल हैं, लेकिन मृतकों की सूची में अब तक पापाराव का नाम शामिल नहीं है। पुलिस के अनुसार, मारे गए नक्सलियों में डीवीसीएम (DVCM) दिलीप बेड़जा एक बड़ा चेहरा है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षा बल पापाराव की तलाश में ही एक विशेष सर्च ऑपरेशन पर निकले थे।

कौन है पापाराव और क्यों है वह सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती?

56 वर्षीय पापाराव उर्फ मंगू, मूल रूप से सुकमा जिले का निवासी है और वर्तमान में नक्सलियों की दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का सक्रिय सदस्य है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी है। आधुनिक हथियारों (AK-47) से लैस पापाराव बस्तर के दुर्गम जंगलों और भौगोलिक परिस्थितियों का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। पुलिस का मानना है कि यदि पापाराव का खात्मा होता है या वह आत्मसमर्पण करता है, तो पश्चिम बस्तर में नक्सलियों का सैन्य ढांचा पूरी तरह ढह जाएगा। बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा के सरेंडर के बाद पापाराव ही एकमात्र ऐसा शीर्ष नक्सली बचा है जो युद्ध कौशल में निपुण है।

एक साल के भीतर ताश के पत्तों की तरह बिखरा नक्सल संगठन

पिछले 18 महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के ‘किलर नेटवर्क’ को बुरी तरह ध्वस्त किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल में माड़वी हिड़मा, बसवाराजू और गणेश उइके जैसे 17 खूंखार लीडर्स का एनकाउंटर किया जा चुका है। संगठन के शीर्ष स्तर पर अब केवल देवजी, मिशिर बेसरा और गणपति ही बचे हैं जो किसी तरह संगठन को चला रहे हैं। भूपति और रामधेर जैसे बड़े नामों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। नक्सलियों का कभी अभेद्य माना जाने वाला एमएमसी (MMC) जोन अब खत्म हो चुका है और उत्तर बस्तर एवं माड़ डिवीजन से भी उनका लगभग सफाया हो गया है।

बस्तर में नक्सलवाद के पतन के सरकारी आंकड़े

छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कगार’ और अन्य नक्सल विरोधी अभियानों ने संगठन की कमर तोड़ दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार:

  • मुठभेड़ में ढेर नक्सली: 262

  • गिरफ्तार नक्सली: 884

  • आत्मसमर्पण: 1600 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौटे

  • हथियार व विस्फोटक: 645 हथियार और 875 आईईडी (IED) बरामद इस संघर्ष में जहां 23 जवान शहीद हुए हैं, वहीं नक्सलियों ने अपनी बौखलाहट में 48 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या भी की है।

संगठन में बचे केवल कुछ आर्म कैडर, अंत अब बेहद करीब

आईजी सुंदरराज पी के अनुसार, बड़े कमांडरों के खात्मे और आत्मसमर्पण के बाद अब बस्तर के अलग-अलग इलाकों में केवल 200 से 300 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं। ये छोटे-छोटे समूहों में अपनी जान बचाने के लिए छिपे हुए हैं। अब सुरक्षा बलों का पूरा ध्यान ‘बटालियन नंबर 1’ के अवशेषों और पापाराव जैसे लड़ाकू कमांडरों को पकड़ने पर है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर अब नक्सलवाद के अंतिम दौर में प्रवेश कर चुका है और पापाराव का अंत इस संगठन के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।

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