Bengaluru fire incident : बेंगलुरु के स्टील मार्केट इलाके में एक बहुमंजिला बिल्डिंग में शुक्रवार देर रात लगी आग ने भीषण त्रासदी का रूप ले लिया। हादसे में राजस्थान के जालोर जिले के 5 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बिजनेसमैन, एक महिला और दो मासूम बच्चे शामिल हैं। इस दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों को उजाड़ दिया और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा?
आग लगने की घटना शुक्रवार रात को हुई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग बिल्डिंग के एक गोदाम से शुरू हुई, जो लकड़ी के बर्तनों के बिजनेस से जुड़ा था। देखते ही देखते आग ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।

जिंदा जल गए पूरा परिवार
हादसे में भीनमाल (जालोर) के मोदरान गांव के मदन सिंह राजपुरोहित, उनकी पत्नी और दो नाबालिग बेटों की मौत हो गई। मदन सिंह पिछले 15 सालों से परिवार के साथ बेंगलुरु में रह रहे थे और उनका व्यवसाय उसी बिल्डिंग में स्थित था।
शोकाकुल रिश्तेदार अनिल सिंह राजपुरोहित ने बताया कि शुक्रवार को कुछ रिश्तेदारों के साथ एयरपोर्ट से लौटने के बाद मदन सिंह रात में गोदाम देखने गए थे। चूंकि वे नहीं चाहते थे कि परिवार की नींद में खलल पड़े, इसलिए उन्होंने फ्लैट का गेट बाहर से बंद कर दिया। आग लगने पर उनका परिवार बाहर नहीं निकल सका और तीनों की दम घुटने और जलने से मौत हो गई।
रानीवाड़ा का युवक भी बना हादसे का शिकार
दूसरी ओर, रानीवाड़ा (जालोर) के भादरूणा गांव के 25 वर्षीय सुरेश कुमार की भी मौत हो गई। सुरेश स्टील मार्केट की उसी बिल्डिंग में दूसरी मंजिल पर बने एक गोदाम में सो रहे थे। वे क्रॉकरी की दुकान चलाते थे और परिवार के साथ बेंगलुरु में ही रहते थे।

रेस्क्यू में भी हुई दिक्कत
घटना के बाद फायर ब्रिगेड की 18 गाड़ियों को आग बुझाने के लिए लगाया गया, लेकिन संकरे इलाके की वजह से राहत कार्य में भारी परेशानी आई। एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। रेस्क्यू में समय लगने से जनहानि बढ़ गई।
जांच के आदेश, प्रशासन पर उठे सवाल
पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता आर.वी. देवराजू ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच के आदेश की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अग्निशमन इंतजामों की गंभीर कमी है और प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि शहरी बाजारों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी जानलेवा हो सकती है। जालोर के दो परिवारों के लिए यह एक कभी न भूलने वाला दुखद दिन बन गया। स्थानीय प्रशासन को अब न केवल हादसे की जांच करनी होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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