ICRIER report India : इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल रिलेशन्स (ICRIER) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारतीय निर्यात पर गहरा असर पड़ रहा है। ‘Navigating Trump’s Tariff Blow’ शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका को भारत का लगभग 70% निर्यात अब 50 प्रतिशत टैरिफ के दायरे में आ गया है, जिसका मूल्य करीब 60.85 बिलियन डॉलर है।

किसे हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?
रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स और कृषि उत्पाद जैसे श्रम प्रधान सेक्टर इस टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इन सेक्टरों से जुड़े लाखों श्रमिकों और किसानों की रोज़ी-रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

टेक्सटाइल सेक्टर को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में 30% ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
ज्वेलरी एक्सपोर्ट, जिसकी अमेरिकी बाज़ार में हिस्सेदारी 11.9 अरब डॉलर है, अब तुर्की और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों से कड़ी टक्कर झेल रहा है।
ऑटो पार्ट्स, जो भारत से अमेरिका को किए गए कुल निर्यात का 3% हिस्सा है, भी इस टैरिफ के कारण असुरक्षित हो गया है।
कृषि सेक्टर, खासकर झींगा निर्यात, को भी सबसे बड़ा झटका लगा है।
भारत की प्रतिक्रिया और अगला कदम
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के मानसून सत्र में बताया कि केंद्र सरकार ट्रंप टैरिफ के प्रभाव की गहन समीक्षा कर रही है और राष्ट्रीय हित में सभी जरूरी कदम उठाएगी।
वहीं, विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आवश्यकताओं के मद्देनज़र रूस से तेल का आयात जारी रखेगा। MEA ने अमेरिका द्वारा भारत को निशाना बनाए जाने को अनुचित और अविवेकपूर्ण बताया।
व्यापार समझौते की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर मार्च 2025 में बातचीत शुरू हुई थी, जिसे अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अमेरिका की ओर से फिलहाल संवाद को लेकर असहमति बनी हुई है, लेकिन भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह संवाद और समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
ICRIER की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ट्रंप टैरिफ से भारत का निर्यात, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह अमेरिका से बातचीत तेज करे और निर्यात बाजार का विविधीकरण करे, ताकि अमेरिकी निर्भरता कम हो सके और घरेलू उद्योगों को स्थायित्व मिल सके।










