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Bhooth Bangla Review : अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी ने फिर मचाया धमाल, पैसा वसूल फिल्म

Bhooth Bangla Review :  हिंदी सिनेमा के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार और मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन की जादुई जोड़ी ने लगभग 14 साल के लंबे इंतजार के बाद बड़े पर्दे पर वापसी की है। आज के दौर में जब बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस पर केवल हिंसा, खून-खराबे और भारी-भरकम एक्शन फिल्मों का बोलबाला है, ऐसे में ‘भूत बंगला’ ताजी हवा के एक झोंके की तरह आई है। यह फिल्म न केवल दर्शकों को डराती है, बल्कि हंसी के ऐसे फव्वारे छोड़ती है कि आपका पेट दुखने लगेगा। प्रियदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हॉरर और कॉमेडी का सटीक तालमेल बिठाने में उनका कोई सानी नहीं है।

कहानी: वसीयत, 500 करोड़ का महल और ‘वधुसुर’ का खौफ

फिल्म की कहानी ‘फुकरा’ अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। अर्जुन दिल का बुरा नहीं है, लेकिन अपनी हरकतों और उधारी की आदतों की वजह से अपने पिता वासुदेव आचार्य (जिशु सेनगुप्ता) के लिए सिरदर्द बना रहता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब अर्जुन की बहन मीरा (मिथिला पारकर) की शादी तय होती है। अर्जुन एक ऐसी जगह की तलाश में होता है जहां भव्यता तो हो लेकिन खर्चा कम। इसी बीच उसे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के ‘मंगलपुर’ गांव में उनके दादाजी उनके नाम 500 करोड़ की संपत्ति और एक विशाल महल छोड़ गए हैं।

अर्जुन खुशी-खुशी अपनी टीम के साथ वहां पहुंचता है, लेकिन मंगलपुर का वह बंगला शापित है। वहां ‘वधुसुर’ नाम का एक राक्षस है, जिसकी वजह से गांव में सालों से शादियां बंद हैं। अब अर्जुन उस महल के रहस्यों से कैसे निपटता है और क्या उसकी बहन की शादी बिना किसी साये के संपन्न हो पाती है, यही फिल्म का मुख्य रोमांच है।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले: प्रियदर्शन का सिग्नेचर स्टाइल

प्रियदर्शन की फिल्मों की अपनी एक अलग दुनिया होती है—थोड़ी लाउड, थोड़ी कार्टूनिश, लेकिन भावनाओं से भरपूर। ‘भूत बंगला’ में उन्होंने पुराने दौर के ‘हेरा-फेरी’ और ‘भूल भुलैया’ वाले जादू को आधुनिक सिनेमा के मिजाज के साथ जोड़ा है। रोहन शंकर और अभिलाष नायर की राइटिंग ने कहानी को नई पीढ़ी के दर्शकों से जोड़ने में मदद की है। फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि आपको बोर होने का मौका नहीं मिलता। विशेष रूप से ‘भागम भाग’ के मशहूर सीन ‘बहन डर गई’ को जिस तरह से नए अंदाज में पेश किया गया है, वह सिनेमाहॉल में सीटियों और तालियों की गूंज पैदा कर देता है।

अक्षय कुमार की फॉर्म में वापसी और कॉमिक ब्रिगेड का जलवा

अक्षय कुमार को अरसे बाद उनके असली कॉमिक अवतार में देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और टाइमिंग कमाल की है। लेकिन फिल्म की असली जान वह ‘कॉमिक ब्रिगेड’ है जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार था। परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी जब एक साथ फ्रेम में आते हैं, तो हंसी रोकना नामुमकिन हो जाता है।

अक्टूबर 2025 में दुनिया को अलविदा कह चुके दिग्गज कलाकार असरानी की यह आखिरी फिल्मों में से एक है, और उन्हें स्क्रीन पर देखना दर्शकों को भावुक भी करता है। इसके अलावा तब्बू, मनोज जोशी और जाकिर हुसैन जैसे मंझे हुए कलाकारों ने फिल्म की गंभीरता को बनाए रखा है, वहीं वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।

निष्कर्ष: क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?

‘भूत बंगला’ उन लोगों के लिए एक मास्टरपीस है जो ‘टॉक्सिक मर्दानगी’ और ‘वॉयलेंस’ वाली फिल्मों से ऊब चुके हैं। यह एक शुद्ध पारिवारिक फिल्म है जिसे आप बच्चों और बड़ों के साथ बिना किसी झिझक के देख सकते हैं। अगर आप फिल्म में बहुत ज्यादा गहरा लॉजिक या ऑस्कर लेवल की संजीदगी ढूंढ रहे हैं, तो शायद यह आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप केवल मनोरंजन, सुकून और दिल खोलकर हंसने के लिए थिएटर जाना चाहते हैं, तो अक्षय कुमार का यह ‘भूत बंगला’ आपके लिए सबसे बेस्ट विकल्प है। यह फिल्म साबित करती है कि कॉमेडी के किंग आज भी अक्षय कुमार ही हैं।

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