Bhoramdev Corridor Project
Bhoramdev Corridor Project: छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कवर्धा जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘भोरमदेव मंदिर’ अब एक नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से यहाँ 146 करोड़ रुपए की लागत से एक विशाल कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। नए साल के शुभ अवसर पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत भूमिपूजन कर विकास की नई इबारत लिख दी गई है।
नए साल के पहले दिन केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव मंदिर परिसर में पहुंचकर कॉरिडोर निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘स्वदेश दर्शन योजना 2.0’ के तहत इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। शेखावत ने जोर देकर कहा कि जिस तरह उज्जैन के महाकाल लोक और वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, उसी तर्ज पर भोरमदेव कॉरिडोर का विकास किया जाएगा ताकि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पर्यटन को विश्व पटल पर नई पहचान मिल सके।
यह कॉरिडोर केवल मुख्य मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक सुव्यवस्थित पर्यटन सर्किट के रूप में डिजाइन किया गया है। 146 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत भोरमदेव मंदिर परिसर, ऐतिहासिक मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर सरोदा जलाशय को एक सूत्र में पिरोया जाएगा। इस पूरे रूट को सुगम और सुंदर बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालु और पर्यटक एक ही परिसर में छत्तीसगढ़ की प्राचीन वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें।
भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र की जनता को एक और बड़ी खुशखबरी दी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विशेष आग्रह पर मुख्यमंत्री ने भोरमदेव से बोड़ला तक की सड़क के चौड़ीकरण और नवीनीकरण कार्य की आधिकारिक घोषणा की। इस सड़क के बनने से पर्यटकों का आवागमन सुगम होगा और स्थानीय व्यापार को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1,000 साल पुराने बाबा भोरमदेव के मंदिर का विकास उनकी सरकार की प्राथमिकता है और आज का दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर बताया कि इस कॉरिडोर की परिकल्पना और स्वीकृति चैत्र माह के भोरमदेव महोत्सव के दौरान मिली थी। उन्होंने मुख्यमंत्री साय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन के विकास के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है। कॉरिडोर के बनने से न केवल धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। भोरमदेव महोत्सव की तेरहवीं तिथि को जिस विकास का संकल्प लिया गया था, वह अब हकीकत बनने जा रहा है।
भोरमदेव को ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहा जाता है। इस कॉरिडोर परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्राचीन धरोहर को संरक्षित करते हुए पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना है। इसमें बेहतर लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग, सूचना केंद्र और सुव्यवस्थित पैदल मार्ग बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और स्थानीय विधायक भावना बोहरा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को सहेजने वाला बताया।
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