Bhupen Borah BJP
Bhupen Borah BJP: असम की राजनीति में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हिस्सा बनने जा रहे हैं। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री सरमा और भूपेन बोरा के बीच हुई औपचारिक मुलाकात ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए घोषणा की कि भूपेन बोरा आगामी 22 फरवरी को आधिकारिक तौर पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। गौरतलब है कि बोरा ने सोमवार, 16 फरवरी को कांग्रेस के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने उनके इस्तीफे को नामंजूर करते हुए उन्हें मनाने की पुरजोर कोशिश की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ उनकी मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि वे अब वापसी के मूड में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि भूपेन बोरा के पार्टी में शामिल होने से जुड़ी तमाम औपचारिकताओं को दिलीप सैकिया पूरा करेंगे। इतना ही नहीं, बोरा के साथ गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर क्षेत्र के कई अन्य प्रभावशाली कांग्रेस नेता भी भाजपा का भगवा ध्वज थामेंगे। हिमंता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भूपेन बोरा कांग्रेस में ‘आखिरी मान्यता प्राप्त हिंदू नेता’ थे। इस विलय को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी मंजूरी दे दी है, जो असम भाजपा के लिए एक बड़ी संगठनात्मक जीत मानी जा रही है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा के भाजपा में आने को एक ‘घर वापसी’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जहाँ सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलता है, जबकि कांग्रेस अब मुख्यधारा के असमिया लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने कहा कि बोरा को भाजपा में वह पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी जिसके वे हकदार हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, कांग्रेस की मौजूदा कार्यप्रणाली उन नेताओं के लिए कष्टकारी है जो वास्तव में जमीन पर काम करना चाहते हैं।
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए हिमंता ने कहा कि उन्होंने भी वही पीड़ा झेली थी जो आज बोरा झेल रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को ‘सामंती’ बताते हुए कहा कि वे लोग जमीन से कटे हुए हैं और उन्हें लगता है कि एक फोन कॉल से किसी का भी फैसला बदला जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रवाद के मुद्दे को भी हवा दी और इशारा किया कि जो लोग असमिया हितों की रक्षा नहीं कर सकते, उनके साथ रहना स्वाभिमानी नेताओं के लिए अब मुमकिन नहीं है।
जब मुख्यमंत्री से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की प्रस्तावित गुवाहाटी यात्रा और उसके संभावित प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। सरमा ने कहा कि असम की राजनीति में स्थानीय नेताओं का कद बाहर से आने वाले नेताओं से कहीं बड़ा है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, “असम के संदर्भ में, मैं प्रियंका गांधी से बड़ा नेता हूँ, भूपेन बोरा उनसे बड़े नेता हैं और दिलीप सैकिया भी उनसे बड़े नेता हैं।” उनका मानना है कि स्थानीय मतदाताओं पर बाहरी चेहरों का कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
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