रायपुर @thetarget365 छत्तीसगढ़ सरकार ने बल्क में डीजल खरीद पर वैट घटाकर 17 फीसदी कर दिया है। इस निर्णय के पीछे राज्य को पड़ोसी राज्यों से डीजल की आयात के कारण हो रहे सालाना करीब पांच सौ करोड़ रुपये के नुकसान को रोकना मुख्य उद्देश्य है। नई व्यवस्था के तहत बड़े कारोबारी बल्क में डीजल खरीदने पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर की बचत कर सकेंगे।
प्रदेश में हाई स्पीड डीजल पर पहले 23 फीसदी वैट और 1 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। हालांकि, उत्तर प्रदेश और गुजरात में डीजल पर क्रमशः 17 फीसदी और 14 फीसदी वैट होने से बड़े कारोबारी इन राज्यों से डीजल मंगवा रहे थे। इससे छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व में भारी कमी हो रही थी।
सरगुजा संभाग में खनन और निर्माण कार्य से जुड़े कारोबारियों द्वारा उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में डीजल मंगवाने की वजह से राज्य सरकार को डेढ़ लाख किलोलीटर डीजल पर वैट का नुकसान हुआ। नई व्यवस्था के तहत अब छत्तीसगढ़ में भी बल्क डीजल खरीदने पर 17 फीसदी वैट लागू होगा, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ने की उम्मीद है।
★ बल्क डीजल खरीदने के लिए न्यूनतम 12 किलोलीटर की खरीद अनिवार्य।
★ केवल सरकारी तेल कंपनियों, नयारा एनर्जी लिमिटेड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेल पंपों से ही खरीद की अनुमति।
★ स्थानीय वाणिज्यिक कर अधिकारी से स्वीकृति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक।
★ छूट सड़कों, पुलों, बांधों, पाइपलाइन बिछाने, संयंत्र निर्माण और लाइसेंसधारी विस्फोटक कारोबारियों को ही मिलेगी।
माइनिंग क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रचलित डीजल विक्रय दर, लगभग 94 रु कोड कर, माइनिंग कार्य में उपयोग होनेवाले डीजल का स्थानीय डीज़ल दर के अनुसार SECL और CMDC से भुगतान प्राप्त कर रही थीं, जबकि मुगलसराय से 78 से 80 रु प्रति लीटर डीज़ल मंगा कर न केवल टैक्स चोरी कर अनुचित लाभ ले रही थीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के टैक्सेशन लॉ और स्टेट टैक्स रेगुलेशन के विपरीत कार्य भी कर रही थीं।माइनिंग कंपनियां स्थानीय डीजल दर कोड कर जो भुगतान प्राप्त कर रही हैं, वह उन्हें उत्तर प्रदेश से 16 रु प्रति लीटर कम में डीजल प्राप्त होने से कंपनियों को तो जबरदस्त मुनाफा हो रहा था लेकिन सरकार को वास्तविक टैक्स, प्राप्त नहीं हो पा रहा था।
इन कंपनियों के टैक्स और जीएसटी की गणना छत्तीसगढ़ में प्रचलित डीजल के दर से की जा रही है, जबकि इन्हें 16 रु कम में उत्तर प्रदेश से डीजल प्राप्त हो जा रहा है, इस प्रकार प्रति लीटर लगभग 16 रुपए टैक्स चोरी की जा रही है। ऐसे कई माइनिंग कम्पनियों की खपत प्रतिदिन लाखों लीटर में है। उत्तर प्रदेश से डीजल मांगने वाली कई ऐसे फर्म भी हैं, जिन्होंने ना तो कंज्यूमर पंप लिया है, न ही उनके पास एक्सपलोसीव का लाइसेंस है। केवल कुछ हज़ार लीटर संग्रहण क्षमता के टैंक की अनुमति लेकर प्रतिदिन 2 से 3 लाख लीटर डीजल मंगा रहे हैं।
क्रेशर और अन्य औद्योगिक उपयोग बताकर चल रहे कंज्यूमर पंप, जिनके द्वारा उत्तर प्रदेश से डीजल मंगाया जा रहा है उनके रॉयलटी भुगतान/ पीट पास, उत्तर प्रदेश से मंगाए जा रहे डीजल और औद्योगिक इकाई के उत्पाद की जांच से निर्धारित खपत से कई गुना ज्यादा डीजल मंगा कर मार्केट में अनधिकृत रूप से बेचने का बड़ा मामला उजागर हो सकता है।
सरगुजा पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने कई बार कलेक्टर को ज्ञापन देकर इस पर रोक लगाने की मांग की थी। ऑयल इंडस्ट्री ट्रांसपोर्ट गाइडलाइन डिसिप्लिन के अनुसार व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश से आने वाले टैंकरों द्वारा इस नियम के अनवरत उल्लंघन पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जा रही थी। राज्य सरकार की इस पहल से अब उत्तर प्रदेश से आने वाले डीजल पर तो रोक लग जाने की संभावना है, किंतु कंज्यूमर पंप द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुरूप डीजल का उपयोग सुनिश्चित करने की चुनौती बरकरार है।
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