Bihar Admit Card
Bihar Admit Card: बिहार के रोहतास जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परीक्षार्थी के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि सरकारी चयन बोर्ड की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ एक अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) में उसकी अपनी तस्वीर के स्थान पर एक कुत्ते की फोटो छाप दी गई है। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे विभाग की भारी किरकिरी हो रही है। इस अजब-गजब घटना ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और डेटा सत्यापन की प्रक्रिया में कितनी गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष छात्रों को भुगतना पड़ता है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला रोहतास जिले के बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धवा गांव का है। यहाँ के निवासी रितेश कुमार ने साल 2022 में बिहार सिविल कोर्ट में चपरासी (Peon) के पद के लिए आवेदन किया था। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले रितेश पिछले तीन सालों से इस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। लंबे इंतजार के बाद जब विभाग ने परीक्षा की तिथि घोषित की और एडमिट कार्ड जारी किए, तो रितेश ने बड़े उत्साह के साथ अपना कार्ड डाउनलोड किया। लेकिन कंप्यूटर स्क्रीन पर जो दिखा, उसे देखकर उनके होश उड़ गए। एडमिट कार्ड पर रितेश का नाम, पिता का नाम और पता तो सही था, लेकिन फोटो वाले कॉलम में उनकी जगह एक कुत्ते की तस्वीर लगी हुई थी।
इस गंभीर त्रुटि को देखकर रितेश कुमार स्तब्ध और आक्रोशित हैं। उन्होंने इस पूरी गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर परीक्षा आयोजित करने वाले बोर्ड और तकनीकी टीम को जिम्मेदार ठहराया है। रितेश का कहना है कि उन्होंने आवेदन के समय अपनी सही फोटो अपलोड की थी, लेकिन डेटा प्रोसेसिंग के दौरान इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई, यह समझ से परे है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने 2022 में पूरी उम्मीद के साथ फॉर्म भरा था। अब जब परीक्षा का समय आया है, तो सिस्टम मेरे साथ ऐसा भद्दा मजाक कर रहा है।” रितेश ने इस मामले में तत्काल सुधार की मांग करते हुए संबंधित विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
रितेश की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि समय बहुत कम बचा है। सिविल कोर्ट के चपरासी पद के लिए लिखित परीक्षा आगामी 15 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली है। रितेश का परीक्षा केंद्र उनके घर से काफी दूर सहरसा जिले में आवंटित किया गया है। एडमिट कार्ड पर फोटो गलत होने के कारण उन्हें डर है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय सुरक्षाकर्मी या वीक्षक उन्हें फर्जी परीक्षार्थी मानकर रोक सकते हैं। परीक्षा में मात्र कुछ दिन शेष रहने के कारण रितेश अब सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते नया एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ, तो उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
यह पहली बार नहीं है जब बिहार में किसी एडमिट कार्ड पर इंसान की जगह जानवर या किसी फिल्मी सितारे की फोटो देखी गई हो। इससे पहले भी कई परीक्षाओं में ऐसी गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। जानकारों का कहना है कि डेटा एंट्री और सर्वर मैनेजमेंट में बरती जाने वाली लापरवाही ही ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण है। रितेश के मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फॉर्म की छंटनी और एडमिट कार्ड जेनरेशन के समय कोई भी मैन्युअल क्रॉस-चेक नहीं किया जाता है। फिलहाल, रितेश न्याय की उम्मीद में हैं ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी परीक्षा दे सकें।
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