Bihar Congress Crisis: बिहार प्रदेश कांग्रेस के भीतर अनुशासन को लेकर पार्टी ने सख्त कदम उठाया है। 8 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित AICC कार्यालय के समीप आयोजित धरना-प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी के मामले में पार्टी ने 29 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बताया गया है कि यह प्रदर्शन बिहार प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व के विरोध में आयोजित किया गया था। अब संबंधित नेताओं से उनकी भूमिका को लेकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नेताओं की गतिविधियों को अनुशासन समिति ने गंभीर माना
बिहार प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव की ओर से जारी नोटिस में संबंधित नेताओं की गतिविधियों पर सवाल उठाए गए हैं। नोटिस के अनुसार, नेताओं का प्रदर्शन में शामिल होना पार्टी की नीति, अनुशासन और निर्धारित निर्देशों के विपरीत माना गया है। अनुशासन समिति ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए सभी संबंधित नेताओं से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
72 घंटे के भीतर देना होगा लिखित स्पष्टीकरण
कारण बताओ नोटिस पाने वाले सभी 29 नेताओं को 72 घंटे के भीतर अपना लिखित जवाब देना होगा। उनसे पूछा गया है कि पार्टी के नियमों के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। समिति ने निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब नेताओं के जवाब के आधार पर पार्टी आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला करेगी।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर होगी कार्रवाई
अनुशासन समिति ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित नेताओं के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा यदि किसी नेता का स्पष्टीकरण पार्टी को संतोषजनक नहीं लगता है, तो कांग्रेस के नियमों के मुताबिक अनुशासनात्मक कदम उठाया जा सकता है। इस चेतावनी के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
पूर्व विधायकों और जिलाध्यक्षों को भी नोटिस
नोटिस पाने वाले 29 नेताओं में कांग्रेस के कई पूर्व पदाधिकारी और पूर्व विधायक भी शामिल हैं। इनमें पूर्व विधायक अनिल सिंह और पूर्व विधायक पूनम देवी के नाम शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण के पूर्व जिलाध्यक्ष भारत भूषण दुबे को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। औरंगाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष मृत्युंजय सिंह से भी पार्टी ने स्पष्टीकरण मांगा है।
कई जिलों के पूर्व पदाधिकारियों से मांगा गया जवाब
कार्रवाई के दायरे में मधेपुरा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येंद्र यादव और सीवान के पूर्व जिलाध्यक्ष विधु शेखर पांडेय समेत कई अन्य नेता भी शामिल हैं। पार्टी ने सभी संबंधित नेताओं से 8 सितंबर के कार्यक्रम में उनकी भूमिका और भागीदारी को लेकर जवाब मांगा है। कुल 29 नेताओं को नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है।
बिहार कांग्रेस में अनुशासन का मुद्दा फिर चर्चा में
इस कार्रवाई को बिहार कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया है कि निर्धारित नीतियों और निर्देशों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि, नोटिस पाने वाले नेताओं का पक्ष अभी सामने आना बाकी है। उनके जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्टी उनके खिलाफ आगे क्या कदम उठाती है।
अब नेताओं के जवाब पर टिकी पार्टी की अगली कार्रवाई
फिलहाल कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 72 घंटे की समयसीमा तय की है। सभी 29 नेताओं के स्पष्टीकरण मिलने के बाद समिति उनके जवाबों की समीक्षा करेगी। यदि जवाब संतोषजनक पाए जाते हैं तो मामले में अलग निर्णय हो सकता है, जबकि जवाब नहीं देने या असंतोषजनक स्पष्टीकरण की स्थिति में पार्टी नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है।
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