Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ गए हैं और सुबह 8 बजे से मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में एनडीए ने भारी बढ़त बनाई है, जबकि महागठबंधन को इस चुनाव में बुरी हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव ने कई बड़े वादे किए थे, जैसे युवाओं को नौकरी देने और महिलाओं के खाते में पैसे भेजने के, लेकिन इन दावों का असर चुनावी नतीजों पर नहीं दिखा। अब सवाल यह उठ रहा है कि तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति कहां गलत साबित हुई? आइए जानते हैं वे पांच बड़े कारण जो उनकी हार की वजह बने।
Bihar Election 2025: 1. कांग्रेस के साथ गठबंधन एक बड़ी गलती
तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल किया, जो उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक गलती मानी जा रही है। बिहार में कांग्रेस का आधार काफी कमजोर है और इसके साथ गठबंधन करने से आरजेडी के परंपरागत वोटरों का समर्थन खो गया। सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने का फैसला भी आरजेडी को महंगा पड़ा। इस गठबंधन का कोई विशेष लाभ नहीं हुआ, जबकि कांग्रेस ने कई सीटों पर आरजेडी के वोटों को ही काट लिया।
Bihar Election 2025: 2. राहुल गांधी के पीछे भागते रहे, सीट बंटवारा बिगड़ा
तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मंजूरी के लिए महीनों इंतजार किया। इस दौरान जमीनी स्तर पर तैयारी कमजोर पड़ गई। कई मजबूत सीटें कांग्रेस को दे दी गईं, जहां आरजेडी के दिग्गज उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकते थे। इस कारण आरजेडी का संगठन कमजोर हुआ और गठबंधन में असंतोष बढ़ा, जो चुनावी नतीजों में साफ नजर आया।
3. मुकेश सहनी को ज्यादा महत्व दिया
तेजस्वी यादव ने छोटे सहयोगी दलों के साथ समझौता किया, खासकर मुकेश सहनी की VIP पार्टी के साथ। सहनी को 10 से ज्यादा सीटें दी गईं और डिप्टी सीएम का पद भी ऑफर किया गया। हालांकि, सहनी का प्रभाव केवल निषाद बहुल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित था। इस कदम ने यादव-मुस्लिम कोर वोट बैंक को नाराज किया, जो महागठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
4. असल मुद्दों को छोड़कर विवादित मुद्दों पर फोकस किया
तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रचार में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे असल मुद्दों के बजाय ‘वोट चोरी’ और ‘ईवीएम हैकिंग’ जैसे विवादित मुद्दों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया। इस रणनीति ने जनता का ध्यान भटकाया और एनडीए ने इसे प्रचारित किया कि आरजेडी हार को स्वीकार कर चुकी है। इससे चुनावी मैदान में आरजेडी के लिए माहौल बनना मुश्किल हो गया।
5. महिलाओं का भारी वोट एनडीए के पक्ष में गया
इस चुनाव में महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले, और इसका सीधा फायदा नीतीश कुमार की जदयू-बीजेपी गठबंधन को हुआ। नीतीश कुमार की शराबबंदी योजना, साइकिल योजना, और महिला आरक्षण जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आकर्षित किया। वहीं, आरजेडी का प्रमुख वादा ’10 लाख नौकरियां’ महिलाओं तक नहीं पहुंच पाया। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं सुरक्षा और विकास योजनाओं के नाम पर एनडीए के पक्ष में वोट देने पहुंची, जिससे आरजेडी की रणनीति कमजोर पड़ी।
बिहार में मतदान और नतीजों की स्थिति
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ था। पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को हुआ था। दोनों चरणों में मतदान प्रतिशत 67.13% रहा, जो बिहार के लिए एक रिकॉर्ड है। इसके साथ ही, बिहार की जनता ने ऐतिहासिक रूप से मतदान किया। अब सभी की निगाहें नतीजों पर हैं, जो यह तय करेंगे कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी।
निष्कर्ष: तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल
बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव की रणनीति असफल रही, और महागठबंधन को भारी नुकसान हुआ। कांग्रेस के साथ गठबंधन, मुकेश सहनी को ज्यादा महत्व देना, और असल मुद्दों को छोड़कर विवादों में फंसना, ये सभी कारण उनकी हार के पीछे माने जा रहे हैं। वहीं, महिलाओं का भारी समर्थन एनडीए के पक्ष में गया, जो इस बार बिहार चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर के रूप में उभरा। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव अपनी रणनीति में क्या सुधार करते हैं।