Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान अपनी सीटों की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एनडीए की ओर से जहां उन्हें अब तक 25 सीटों का ऑफर मिला है, वहीं चिराग पासवान अब भी 35 सीटों पर अड़े हुए हैं।

चिराग पासवान ने बुलाई आपात बैठक
इस मुद्दे को लेकर चिराग पासवान ने आज (बुधवार) सुबह पटना में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यालय में आयोजित की गई है, जिसमें सभी सांसद, प्रदेश उपाध्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष और प्रधान सचिव को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि बैठक में सीट शेयरिंग पर अंतिम निर्णय और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

चिराग की डिमांड क्या है?
सूत्रों की मानें तो चिराग पासवान की प्रमुख मांग यह है कि LJP (रामविलास) को उन लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्राथमिकता दी जाए, जहां पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। उनकी मांग 35 से 45 सीटों की है, जबकि एनडीए की ओर से अब तक केवल 25 सीटें प्रस्तावित की गई हैं।
एनडीए के अंदर क्या हो रहा है?
पिछले कुछ दिनों से भाजपा, जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के बीच बैठकों का दौर जारी है। हालांकि सभी दल गठबंधन को मजबूत बताने में लगे हैं, लेकिन अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच मंगलवार को भी लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “एनडीए में सब कुछ ठीक है। सभी नेताओं के साथ बातचीत हो रही है – चाहे वो चिराग पासवान हों या जीतन राम मांझी। बहुत जल्द अच्छी खबर मिलेगी।”
क्या हो सकता है आगे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर चिराग पासवान की मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो LJP (रामविलास) एक बार फिर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला ले सकती है, जैसा कि 2020 में हुआ था। हालांकि उस बार इसका नुकसान एनडीए को उठाना पड़ा था। यही वजह है कि बीजेपी और जेडीयू चिराग को साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार चुनाव 2025 के पहले ही एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। चिराग पासवान की मांगें क्या मान ली जाएंगी या फिर एक बार फिर वह अलग राह पकड़ेंगे – इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में सामने आ सकता है। लेकिन इतना तय है कि चिराग की रणनीति इस बार भी बिहार की सियासत में अहम भूमिका निभाने वाली है।










