Sonam Wangchuk detained: जोधपुर जेल में बंद सोनम वांगचुक से पत्नी गीतांजलि की मुलाकात, डिटेंशन ऑर्डर को कोर्ट में दी जाएगी चुनौती

Sonam Wangchuk detained:  लद्दाख के चर्चित पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मंगलवार रात उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने जोधपुर सेंट्रल जेल में मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ वकील रितम खरे भी मौजूद थे। वांगचुक फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में हैं।मुलाकात के बाद गीतांजलि ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट कर कहा,

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“आज रितम खरे के साथ वांगचुक से मुलाकात की। हमें उनका डिटेंशन ऑर्डर मिला है, जिसमें उन पर लगाए गए आरोपों का विवरण है। अब हमारी कानूनी टीम इस आदेश को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।”

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क्या है मामला?

24 सितंबर को लद्दाख में छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक बड़े विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, जिसमें हिंसा भड़क उठी और चार लोगों की जान चली गई। प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक के भड़काऊ भाषणों और युवाओं को उकसाने के चलते कानून-व्यवस्था बिगड़ी। इसी आधार पर उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार किया गया और लेह से जोधपुर जेल भेज दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

2 अक्टूबर को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके पति की तत्काल रिहाई की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने वांगचुक का पक्ष रखा।

5 अक्टूबर को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि डिटेंशन ऑर्डर की प्रति वांगचुक की पत्नी को सौंपी जाए और उन्हें जेल में समुचित मेडिकल सुविधा दी जाए।

अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी। अब जबकि वकीलों की टीम को डिटेंशन ऑर्डर प्राप्त हो गया है, वह इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देने के लिए तैयार है। वांगचुक के समर्थकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में इस गिरफ्तारी को लेकर गहरी नाराजगी है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और उस पर हो रही कानूनी लड़ाई ने देशभर में चर्चा बटोरी है। उनके समर्थकों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों पर NSA लगाना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि वांगचुक को जल्द रिहाई मिलेगी या नहीं।

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