Bihar Elections 2025: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इसी कड़ी में प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी ने चुनावी तैयारी को धार देते हुए अपने 10 और उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने सोमवार को दूसरी आधिकारिक सूची जारी की, जिसमें बिहार की कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम शामिल किए गए हैं।

किन सीटों पर किसे मिला टिकट?
जन सुराज की इस सूची में शिवहर, भागलपुर, नरपतगंज, इस्लामपुर जैसी चर्चित सीटों पर उम्मीदवार तय किए गए हैं। सबसे चर्चित नाम सिवान के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. शाहनवाज आलम का है, जिन्हें बड़हड़िया विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है।

इसके अलावा अन्य उम्मीदवारों के नाम इस प्रकार हैं:
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भागलपुर – अभयकांत झा
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शिवहर – नीरज सिंह
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नरकटिया – लालाबाबू यादव
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कल्याणपुर – मंतोष सहनी
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संदेश – राजीव रंजन सिंह
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बाजपट्टी – आज़म अनवर हुसैन
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हरलाखी – रत्नेश्वर ठाकुर
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नरपतगंज – जनार्दन यादव
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इस्लामपुर – तनुजा कुमारी
प्रशांत किशोर की रणनीति पर नज़र
प्रशांत किशोर, जो रणनीतिकार से नेता बने हैं, बिहार की राजनीति में जनता से सीधे जुड़ने और ज़मीनी मुद्दों को उठाने की बात कर रहे हैं। जन सुराज की टिकट वितरण प्रक्रिया को भी पारदर्शी और स्थानीयता को प्राथमिकता देने वाली प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उम्मीदवारों का चयन योग्यता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और जनसंपर्क को ध्यान में रखकर किया गया है। महिला, युवा और पिछड़े वर्ग से आने वाले उम्मीदवारों को तरजीह दी जा रही है।
क्या कहती है राजनीतिक समीकरण?
बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी नई ज़रूर है, लेकिन प्रशांत किशोर की सक्रियता और लगातार हो रही यात्राएं पार्टी को सुर्खियों में बनाए हुए हैं। अब तक घोषित 20 उम्मीदवारों में क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की गई है, जो यह दिखाता है कि पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी का जनाधार बढ़ता है, तो यह राजद, जदयू और भाजपा जैसे बड़े दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।जन सुराज पार्टी की दूसरी सूची के साथ यह साफ है कि पार्टी अब चुनावी मैदान में पूरी ताकत से उतरने को तैयार है। प्रशांत किशोर की रणनीति, संगठन की संरचना और जनता से जुड़ाव उन्हें अन्य दलों से अलग पहचान दिला रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता 2025 के विधानसभा चुनाव में नई राजनीति के इस प्रयोग को कितना समर्थन देती है।










