Bihar Election
Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है। इस चरण में राज्य की 122 विधानसभा सीटों पर कुल 1302 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस चरण में 3 करोड़ 70 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इनमें 1.75 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जो इस चरण की चुनावी तस्वीर को खास बना रही हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, कुल 45,399 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है, जिनमें से 40,073 केंद्र ग्रामीण इलाकों में स्थापित किए गए हैं। हिसुआ (नवादा) सीट पर सबसे ज्यादा 3.67 लाख मतदाता हैं, जबकि लौरिया, चनपटिया, रक्सौल, त्रिवेणीगंज, सुगौली और बनमखी जैसी सीटों पर 22-22 प्रत्याशी मैदान में हैं। पहले चरण में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था, जिससे आयोग को उम्मीद है कि दूसरे चरण में भी मतदाता उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।
इस बार का चुनावी केंद्र विशेष रूप से सीमांचल क्षेत्र रहा है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे नेपाल सीमा से सटे जिलों में मतदान हो रहा है। इन जिलों में जनसंख्या की विविधता और सामाजिक समीकरणों के कारण राजनीतिक दलों की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीमांचल की कई सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। कुल चार लाख से अधिक सुरक्षा बलों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। संवेदनशील बूथों पर सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई है ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से भी अपील की है कि वे निर्भय होकर मतदान करें और लोकतंत्र को सशक्त बनाएं।
दूसरे चरण में मुकाबला एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीधी टक्कर का है। एनडीए जहां विपक्ष पर “घुसपैठियों को संरक्षण देने” का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्षी दल ग्रामीण और अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन पर भरोसा जता रहे हैं। सीमांचल की सीटों पर दोनों गठबंधनों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है, और नतीजे भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं।
इस चरण में कई बड़े नेताओं की साख भी दांव पर लगी है। जेडीयू के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (सुपौल), बीजेपी की रेनू देवी (बेतिया), नीरेज कुमार सिंह ‘बबलू’ (छातापुर), लेशी सिंह (धमदाहा), शीला मंडल (फुलपरस) और जमा खान (चैनपुर) जैसे नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता तारकिशोर प्रसाद भी कटिहार सीट से लगातार पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं।
कटिहार जिले की बलरामपुर और कदवा सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प बन गया है। सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महबूब आलम और कांग्रेस के शकील अहमद खान दोनों ही नेता अपनी तीसरी जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं। इन सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय होने के बावजूद स्थानीय मुद्दे और समुदाय आधारित मतदान पैटर्न निर्णायक साबित हो सकते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव का यह दूसरा और अंतिम चरण राज्य की राजनीतिक दिशा और नेतृत्व को तय करेगा। सीमांचल और उत्तर बिहार की सीटों पर हो रहे मतदान से न केवल गठबंधनों की ताकत का अंदाजा लगेगा, बल्कि ग्रामीण और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका भी स्पष्ट होगी। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि बिहार की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।
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