Bihar Politics
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे साफ हो गए हैं और इस बार जनता ने एक बार फिर एनडीए गठबंधन पर भरोसा जताया है। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा और जेडीयू दोनों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे गठबंधन की स्थिति मजबूत हुई।
दूसरी ओर, महागठबंधन इस चुनाव में केवल 34 सीटों पर सिमट गया, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को उठाना पड़ा। पार्टी की हार ने महागठबंधन के भीतर आंतरिक दबाव और असंतोष को बढ़ा दिया है। राजद की यह करारी हार राजनीतिक गलियारों में लंबी चर्चा का विषय बनी हुई है।चुनाव नतीजों के बाद लालू परिवार में विवाद ने नई उभरती राजनीतिक खटपट को जन्म दिया है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने का ऐलान किया। उनके इस कदम ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से संपर्क तोड़ रही हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय यादव और रमीज का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने उनसे यही करने को कहा था और सारा दोष अपने ऊपर ले रही हैं। उनका यह बयान राजद के भीतर आंतरिक असहमति और विवाद को उजागर करता है।संजय यादव को तेजस्वी यादव का सलाहकार माना जाता है और वह वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।
वहीं, रमीज को तेजस्वी के करीबियों में गिना जाता है। रोहिणी के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के अंदर न केवल चुनावी हार का असर है, बल्कि परिवार और सलाहकार मंडल के बीच स्ट्रक्चरल मतभेद भी सामने आए हैं।
रोहिणी आचार्य ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक डेब्यू किया था। उन्होंने आरजेडी की परंपरागत सीट सारण से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में राजीव प्रताप रूडी ने उन्हें मात दी थी। हार और परिवारिक विवाद ने रोहिणी को राजनीतिक और व्यक्तिगत संकट दोनों में डाल दिया है।
राजद के भीतर यह विवाद पार्टी के आगामी रणनीति और नेतृत्व पर सवाल खड़े करता है। चुनाव में मिली हार और रोहिणी के फैसले ने यह संकेत दिया कि पार्टी को भविष्य में नई रणनीति और संगठनात्मक सुधार की आवश्यकता है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यादव परिवार में उभरी यह फूट राजद की राजनीतिक छवि और कार्यकर्ताओं में उत्साह को प्रभावित कर सकती है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत और राजद की करारी हार ने राज्य की राजनीति में नए परिदृश्य को जन्म दिया है। यादव परिवार के अंदर उभरे विवाद, रोहिणी आचार्य का राजनीति छोड़ने का ऐलान और पार्टी के भीतर असंतोष ने इसे और भी जटिल और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में राजद की कदम दर कदम रणनीति और परिवारिक तालमेल बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की दिशा तय करेंगे।
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