Bihar SIR : सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को बिहार के स्पेशल रजिस्टर ऑफ इंडियन (SIR) से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई हुई, जिसमें आधार को नागरिकता के प्रमाण के रूप में मान्यता देने को लेकर बहस छिड़ गई। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में जोर देकर कहा कि यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आधार को नागरिकता के दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।
सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग के आदेशों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों में विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि Booth Level Officers (BLO) को आधार को पहचान के दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का मौखिक निर्देश मिला है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा। चुनाव आयोग द्वारा उन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है जिन्होंने आधार को अस्वीकार किया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सिब्बल से पूछा, “हर सुनवाई में आधार पर इतना जोर क्यों? क्या आप इसे नागरिकता का प्रमाण मान रहे हैं?” इस पर सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा आधार को नागरिकता प्रमाण के रूप में पेश करना नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि कोर्ट ने पहले आधार को एक स्वीकार्य दस्तावेज माना था, तो उसे दरकिनार नहीं किया जा सकता।”
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप व्यापक प्रचार किया गया है और आधार की कॉपी ऑनलाइन भी जमा की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि नागरिकता सिद्ध करने के लिए पहले से ही 11 मान्य दस्तावेज तय हैं।
सुनवाई के दौरान जज ने दो टूक कहा, “आधार पहचान का प्रमाण हो सकता है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि किसी को नागरिकता सिद्ध करनी है, तो उसे पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या निर्धारित 11 दस्तावेजों में से किसी एक को पेश करना होगा।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट से आग्रह किया कि आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसी कोई मंजूरी अभी तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि संसद या सरकार की ओर से स्पष्ट संशोधन न हो।
बिहार SIR केस की यह सुनवाई नागरिकता और पहचान के प्रमाणों को लेकर एक बार फिर बहस के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार सिर्फ पहचान का माध्यम है, नागरिकता का नहीं। आने वाले दिनों में यह मामला भारत की पहचान और दस्तावेज प्रणाली को लेकर बड़ा दिशा-निर्देशक साबित हो सकता है।
Read More : Nepal Gen Z protest: नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर भड़की जेनरेशन-Z: विरोध के पीछे की पूरी कहानी
MI vs GT : IPL 2026 के सीजन में लगातार चार हार झेलने के बाद…
JEE Main 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026…
SC Netaji Petition : भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को एक…
Bhilai BJP War: भिलाई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर लंबे समय से सुलग रही…
BJP Janakrosh : लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित न…
Raigarh Murder : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने…
This website uses cookies.