Bihar SIR: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए 65 लाख नामों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में किया गया है। 14 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह हटाए गए मतदाताओं के नाम और हटाने के कारणों को सार्वजनिक करे। चुनाव आयोग ने 18 अगस्त को ही यह सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी, जो चुनावी विवादों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

65 लाख मतदाता किस आधार पर हटाए गए?
चुनाव आयोग ने बताया कि कुल 65 लाख नामों में से करीब 22 लाख मृतक, 36 लाख प्रवासी और लगभग 7 लाख डबल रजिस्ट्रेशन के मामले थे। इस बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया बिहार में 24 जून 2025 को शुरू हुई थी, जिसे 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के रूप में जारी किया गया था।

सूची कैसे देखें?
बिहार चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइ https://ceoelection.bihar.gov.in/ पर जाकर, सबसे पहले ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की विंडो को बंद करना होगा। इसके बाद होमपेज पर हटाए गए नामों की सूची देखने का विकल्प मिलेगा। उपयोगकर्ता अपना जिला चुनकर PDF फॉर्मेट में सूची डाउनलोड कर सकते हैं। सूची में EPIC नंबर के आधार पर सर्च भी किया जा सकता है, जिससे नाम की जांच करना आसान हो गया है।
विपक्षी दलों का हमला और सवाल
65 लाख नाम हटाए जाने के बाद कांग्रेस, राजद (RJD), टीएमसी, आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर जमकर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर कमजोर वर्ग और प्रवासी मतदाताओं को वोटर सूची से बाहर करने की साजिश है। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को “वोटर लिस्ट क्लीनिंग” नहीं, बल्कि बीजेपी की “इलेक्शन चोरी ब्रांच” बताया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग से बार-बार हटाए गए नामों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की थी, जिसे चुनाव आयोग ने पहले अस्वीकार कर दिया था।
चुनाव आयोग ने दिया जवाब
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के तहत और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार हुई है। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि 7 दिन के भीतर आरोप साबित नहीं कर पाए तो माफी मांगें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
14 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि हटाए गए नामों और उनके हटाने के कारणों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सूची को ऑनलाइन और स्थानीय स्तर पर पंचायत भवन तथा ब्लॉक कार्यालयों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाए ताकि आम नागरिक भी जांच कर सकें।
वोटर लिस्ट विवाद का राजनीतिक रंग
यह विवाद बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उठा है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने भी विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालना चाहते हैं।
भविष्य की प्रक्रिया पर नजर
चुनाव आयोग की इस खुली सूची के बाद अब आम जनता, राजनीतिक दल और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। लोगों को उम्मीद है कि इस कदम से मतदाता पहचान और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि इस सूची में गलतियां हो सकती हैं और इसे राजनीतिक हित में बदला जा सकता है।
बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का मामला चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग ने सूची सार्वजनिक करके पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाया है, लेकिन राजनीतिक तनाव बरकरार है। आगामी समय में इस मामले की गहन जांच और बेहतर समाधान की जरूरत होगी ताकि लोकतंत्र के मूल अधिकार – मताधिकार – की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
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