Bijapur Encounter
Bijapur Encounter: दक्षिण बस्तर के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में दो माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। बस्तर संभाग के इस संवेदनशील इलाके में सुरक्षाबलों द्वारा चलाया गया यह अभियान माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। मुठभेड़ स्थल से न केवल शव बरामद हुए हैं, बल्कि आधुनिक हथियारों का जखीरा भी मिला है, जो इस क्षेत्र में माओवादियों की सक्रिय उपस्थिति और बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
यह पूरा घटनाक्रम बीजापुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की सटीक खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू हुआ। सूचना मिली थी कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में जंगलों में डेरा डाले हुए हैं। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) की एक विशेष टीम को तत्काल प्रभाव से ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। जवानों ने रणनीति के तहत इलाके की घेराबंदी शुरू की ताकि नक्सलियों को भागने का मौका न मिले।
जैसे ही डीआरजी की टीम लक्षित क्षेत्र के करीब पहुँची, घात लगाकर बैठे माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। चश्मदीदों और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सुबह लगभग 7 बजे पहली मुठभेड़ शुरू हुई। घने जंगलों और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाते हुए माओवादियों ने रुक-रुक कर गोलीबारी जारी रखी। सुरक्षाबलों ने भी अत्यंत संयम और बहादुरी का परिचय देते हुए माओवादियों को करारा जवाब दिया। यह मुठभेड़ काफी देर तक चलती रही, जिससे पूरा इलाका गोलियों की गूँज से थर्रा उठा।
गोलीबारी थमने के बाद जब सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान (सर्चिंग) शुरू किया, तो मौके से दो माओवादियों के शव बरामद हुए। मारे गए नक्सलियों की शिनाख्त अभी की जा रही है। इसके अलावा, सुरक्षाबलों को घटनास्थल से युद्धक सामग्री का बड़ा भंडार मिला है। बरामद हथियारों में एक घातक एके-47 राइफल, एक 9 एमएम पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस व अन्य गोला-बारूद शामिल हैं। इतनी आधुनिक राइफल का मिलना यह दर्शाता है कि मारे गए माओवादी संगठन में किसी महत्वपूर्ण पद पर रहे होंगे।
मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने ढिलाई नहीं बरती है। वर्तमान में भी आसपास के घने जंगलों और संदिग्ध ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षाबलों को संदेह है कि कुछ अन्य माओवादी घायल अवस्था में जंगल की आड़ लेकर छिपे हो सकते हैं। इस सर्च ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य इलाके को पूरी तरह से सुरक्षित करना और किसी भी संभावित विस्फोटक या आईईडी (IED) का पता लगाना है, जो सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाने के लिए लगाए गए हो सकते हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से और चल रहे ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए, वर्तमान में मुठभेड़ के सटीक स्थान और ऑपरेशन में शामिल जवानों की कुल संख्या जैसी जानकारी साझा नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण करना है। जैसे ही सर्चिंग की प्रक्रिया समाप्त होगी, पुलिस प्रशासन द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिसमें मारे गए माओवादियों के नाम और उनके नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध होगी।
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