अपराध

Bilaspur Crime : बिलासपुर में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, पुलिस जांच में खुला बड़ा राज

Bilaspur Crime : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ आज के दौर में सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किस तरह जिंदगियां बर्बाद कर रहा है, इसका एक और प्रमाण मिला है। तोरवा थाना क्षेत्र में इंस्टाग्राम के माध्यम से एक युवती को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने वाले एक शातिर युवक को पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया है।

सीएसपी गगन कुमार (आईपीएस) ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पीड़ित युवती ने न्याय की उम्मीद लेकर बीते 22 मई को तोरवा थाने में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। युवती की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए पुलिस प्रशासन ने मामले की छानबीन शुरू की और आरोपी को उसकी छिपे होने के ठिकाने पर दबिश देकर धर दबोचा। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहाँ से अदालत के कड़े आदेश के बाद उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

जन्मदिन के बहाने होटल में बुलाया

पीड़िता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, कुछ समय पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ पर उसकी पहचान तखतपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम जरेली के निवासी निलेश कुमार जायसवाल (19 वर्ष) से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ता गया और यह सामान्य बातचीत जल्द ही गहरी नजदीकियों में बदल गई। आरोपी निलेश ने युवती को अपनी मीठी-मीठी बातों से झांसा दिया और उसे शादी करने का पूरा भरोसा दिलाते हुए अपने कथित प्रेमजाल में पूरी तरह फंसा लिया।

इसके बाद आरोपी ने अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम देने के लिए अपने जन्मदिन का बहाना बनाया। उसने पीड़िता को तोरवा क्षेत्र के एक नामचीन होटल में मिलने के लिए बुलाया। होटल के कमरे में आरोपी ने एक बार फिर शादी का वादा दोहराया और युवती की मर्जी के खिलाफ जाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध स्थापित किए। इस घटना के बाद जब आरोपी अपने वादे से मुकर गया, तब पीड़िता को खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ और उसने निडर होकर पुलिस की शरण ली।

अदालत का कड़ा रुख

बिलासपुर में अपराध की दूसरी बड़ी खबर न्यायिक गलियारे से आ रही है। बिलासपुर की विशेष न्यायालय (एनआईए) ने नकली नोट दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य रवि जाटवर की दूसरी नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि इस संवेदनशील प्रकरण में अभी भी कई महत्वपूर्ण गवाहों और मुख्य विवेचक (जांच अधिकारी) के बयान दर्ज होना बाकी है। ऐसी स्थिति में यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित किए जाने का गंभीर खतरा बना रहेगा, इसलिए आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत के इस सख्त रुख से ठग गिरोह के हौसले पस्त नजर आ रहे हैं।

एक लाख के बदले 15 लाख का लालच

अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई कहानी के अनुसार, यह पूरा मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भटगांव इलाके का है। यहाँ आरोपी राहुल जाटवार, पीतांबर प्रसार पंकज, पीलाराम यादव और रवि जाटवर ने मिलकर एक संगठित आपराधिक गिरोह तैयार किया था। इस गिरोह ने प्रार्थी खेमराज निराला को अपने झांसे में लेते हुए एक अजीबोगरीब और लुभावना ऑफर दिया।

आरोपियों ने खेमराज को विश्वास दिलाया कि वे उसे महज एक लाख रुपये के असली नोटों के बदले में 15 लाख रुपये के हूबहू दिखने वाले डुप्लीकेट (नकली) नोट मुहैया कराएंगे। प्रार्थी इन ठगों के झांसे में आ गया और उसने आरोपियों को 90 हजार रुपये नकद दे दिए, जबकि बाकी के 10 हजार रुपये डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। कुल एक लाख रुपये ऐंठने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और मौके से रफूचक्कर हो गए।

पुलिस रेड में मिले चाकू और संदिग्ध पाउडर

ठगी का शिकार होने के बाद जब प्रार्थी ने बिलाईगढ़ थाने में अपनी प्राथमिकी दर्ज कराई, तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जाल बिछाया। पुलिसिया जांच और छापेमारी के दौरान सह-आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकली नोट, केमिकल प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला आयोडीन हाइड्रा पाउडर, वारदात में प्रयुक्त बिना नंबर की मोटरसाइकिल और एक घातक चाकू बरामद किया गया।

सरकारी वकील (अभियोजन) ने अदालत में मजबूती से दलील दी कि आरोपी रवि जाटवर इस पूरे गिरोह की रीढ़ था और उसके मेमोरेंडम कथन से साफ हुआ है कि ठगी की पूरी योजना में उसकी सक्रिय भूमिका थी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में यह दलील देने की कोशिश की कि मुख्य प्रार्थी ने घटना का पूरी तरह समर्थन नहीं किया है और गिरोह के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। परंतु विशेष अदालत ने अपराध की प्रकृति को अत्यधिक गंभीर मानते हुए रवि जाटवर की जमानत अर्जी को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

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