Bilaspur Teacher Protest: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को अनिवार्य किए जाने का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को बिलासपुर में शिक्षक साझा मंच के नेतृत्व में जिलेभर के सैकड़ों शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने नेहरू चौक से रैली शुरू की और कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इसके बाद कलेक्टर और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तथा शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
पदोन्नति में TET की अनिवार्यता से नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया में TET को अनिवार्य करने का निर्णय उनके हितों के अनुरूप नहीं है। शिक्षक साझा मंच ने मांग की है कि पदोन्नति के लिए TET की अनिवार्यता को वर्ष 2028 तक शिथिल किया जाए। शिक्षकों के अनुसार केंद्र सरकार ने TET उत्तीर्ण करने के लिए 2028 तक की समयसीमा दी है। ऐसे में पदोन्नति प्रक्रिया में तत्काल TET अनिवार्य करना उचित नहीं माना जा सकता।
वरिष्ठता को पदोन्नति का आधार बनाने की मांग
शिक्षक नेताओं ने कहा कि पदोन्नति में सबसे महत्वपूर्ण आधार वरिष्ठता यानी ज्येष्ठता होना चाहिए। उनका तर्क है कि जो शिक्षक लंबे समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा अवधि को पदोन्नति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। शिक्षकों ने मांग की कि पदोन्नति प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया जाए, जिसमें वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अनुभव का उचित सम्मान हो।
SC-ST शिक्षकों के आरक्षण की भी मांग
TET के मुद्दे के साथ शिक्षकों ने पदोन्नति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों को नियमानुसार आरक्षण देने की मांग भी उठाई। शिक्षक संगठनों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े सभी संवैधानिक और विभागीय प्रावधानों का सही तरीके से पालन होना चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमसम्मत बनाने की अपील की।
कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय TET परीक्षा की मांग
शिक्षक संगठनों ने सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर TET परीक्षा आयोजित करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि यदि पदोन्नति के लिए TET आवश्यक है तो वर्तमान शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी करने और उसे उत्तीर्ण करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से शिक्षकों ने TET की अनिवार्यता को फिलहाल टालने के साथ विभागीय TET परीक्षा जल्द कराने की मांग की है।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने केवल TET का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि अपनी कुल पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया। इनमें TET की अनिवार्यता को शिथिल करने के अलावा मोदी की गारंटी लागू करने और वेतन विसंगति दूर करने जैसी मांगें भी शामिल हैं। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक संतोष सिंह ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लंबे समय से सरकार के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।
2028 तक समय देने की दलील
शिक्षक नेताओं ने दोहराया कि जब TET उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक समय उपलब्ध कराया गया है, तो पदोन्नति के लिए अभी से इसे अनिवार्य करना शिक्षकों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि शिक्षकों को अचानक नई शर्तों के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को इस विषय पर शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा करके व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मंगलवार को आयोजित प्रदर्शन को शिक्षकों ने फिलहाल सांकेतिक आंदोलन बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन में शिक्षक नेता संजय शर्मा, मनोज सनाड्य समेत बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों का कहना है कि वे ऐसी पदोन्नति व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें वरिष्ठता, आरक्षण और कार्यरत शिक्षकों के हितों का संतुलित तरीके से ध्यान रखा जाए।
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