Onion Price Hike: देश में खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने बुधवार को महंगाई के मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि कभी दाल, कभी सब्जियां, कभी तेल और कभी चीनी की कीमतें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
खरगे ने जारी किया खाद्य वस्तुओं की कीमतों का चार्ट
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल में कीमतों की स्थिति की तुलना पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौर से करते हुए एक चार्ट भी साझा किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी महंगाई से जुड़े सवालों को लगातार जनता के सामने उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगेगी।
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का दावा
खरगे ने अपने पोस्ट में प्याज की बढ़ती कीमतों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि एक साल में प्याज के दाम करीब 59 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। उनके मुताबिक, देश के कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि त्योहारों के मौसम में आवश्यक खाद्य सामग्री महंगी होने से आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।
चीनी और सरसों तेल भी महंगा होने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी और सरसों के तेल की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कई जगह चीनी 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है, जबकि कुछ बाजारों में इसका भाव 72 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह सरसों के तेल की कीमत 200 रुपये प्रति लीटर से अधिक होने का दावा किया गया। खरगे ने खाद्य महंगाई और थोक महंगाई के आंकड़ों का भी हवाला दिया।
त्योहारों से पहले महंगाई पर सवाल
खरगे ने इससे पहले भी त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि त्योहारों से पहले चीनी जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ना सीधे तौर पर आम परिवारों की जेब को प्रभावित करता है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को महंगाई नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
चीनी के स्टॉक को लेकर सरकार से सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत में चीनी के उपलब्ध स्टॉक को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, इसके बावजूद देश में चीनी का स्टॉक कथित तौर पर नौ वर्षों के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि स्थिति ऐसी क्यों बनी कि चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और बड़ी मात्रा में ड्यूटी फ्री आयात करने की जरूरत पड़ रही है।
तीन महीने में कीमत बढ़ने का लगाया आरोप
खरगे ने दावा किया कि महज तीन महीनों में चीनी की कीमत में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र से खाद्य महंगाई को लेकर स्पष्ट जवाब और ठोस कदम उठाने की मांग की है।
E20 नीति को लेकर भी उठाया सवाल
खरगे ने चीनी की उपलब्धता और E20 ईंधन नीति के बीच संबंध को लेकर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि जब देश में चीनी की कमी बताई जा रही है और विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है। कांग्रेस का तर्क है कि खाद्य सुरक्षा और ईंधन नीति के बीच संतुलन जरूरी है।
महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी
खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का आरोप है कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और आम परिवारों की मासिक आय-व्यय पर पड़ रहा है। वहीं सरकार की ओर से महंगाई और खाद्य कीमतों को लेकर अलग-अलग समय पर कई कदम उठाए जाते रहे हैं। अब खरगे के ताजा आरोपों के बाद खाद्य महंगाई एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।
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