Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ में बिजली सब्सिडी और सौर ऊर्जा को लेकर सियासी जंग तेज होती जा रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया है कि इस योजना में 80 लाख उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने में सरकार को 127 साल लग जाएंगे और उपभोक्ताओं को सोलर पैनल की लागत वसूलने में 18 साल लगेंगे।

कांग्रेस का आरोप: योजना गरीबों के लिए बोझ
कांग्रेस का कहना है कि यदि बिजली मुफ्त दी जा रही है, तो सोलर पैनल भी मुफ्त में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने ‘बिल हाफ’ योजना को ज़मीनी और गरीबों के हित में बताते हुए कहा कि सूर्य घर योजना असमानता को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस के मुताबिक इस योजना में आम उपभोक्ता को भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार वास्तव में गरीबों और मध्यम वर्ग के हित की बात कर रही है, तो सोलर पैनल की पूरी लागत खुद वहन क्यों नहीं करती?

डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार
कांग्रेस के इन आरोपों पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि, “जनहित के कामों पर कांग्रेस के पेट में हमेशा दर्द होता है। यही वजह है कि वे हमेशा बड़बड़ाते रहते हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देने वाली पहल है, जिसे कांग्रेस सियासी चश्मे से देख रही है।” अरुण साव ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना के तहत 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है और इसका उद्देश्य हर घर को स्वच्छ, सस्ती और सतत ऊर्जा देना है।
क्या है प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना?
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा दे रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली के खर्च में कमी देना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना। योजना में पात्र उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगाने पर सरकारी सब्सिडी मिलती है। राज्य सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पहुंच और विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे किसानों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ होगा।
कांग्रेस की मांग: ‘बिल हाफ’ योजना को फिर से लागू किया जाए
कांग्रेस ने यह मांग की है कि राज्य सरकार ‘बिल हाफ’ योजना को पुनः शुरू करे, जो आम उपभोक्ताओं के लिए कहीं अधिक व्यावहारिक थी। कांग्रेस का तर्क है कि बिजली सब्सिडी सीधे बिल में राहत देती है, जबकि सूर्य घर योजना में शुरूआती लागत अधिक है और इसकी भरपाई में वर्षों लग सकते हैं।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
कांग्रेस द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसमें योजना से जुड़ी आंकड़ों की गणना, सब्सिडी वितरण की गति और योजना की लागत-लाभ का तुलनात्मक विश्लेषण शामिल है। इस वीडियो के आधार पर कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि योजना दिखावे की है, हकीकत में इसका लाभ सीमित वर्ग को ही मिल रहा है। वहीं, भाजपा और राज्य सरकार के प्रवक्ता कह रहे हैं कि कांग्रेस केवल राजनीतिक मुद्दा गढ़ने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ रही है।
आगामी चुनावों में बन सकता है बड़ा मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली सब्सिडी, घरेलू बजट से सीधा जुड़ा मुद्दा होने के कारण, 2028 के विधानसभा चुनावों में बिल हाफ बनाम मुफ्त बिजली योजना एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन सकता है। छत्तीसगढ़ में बिजली योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो चुकी है। जहां भाजपा सरकार प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को दीर्घकालिक समाधान बता रही है, वहीं कांग्रेस बिल हाफ योजना को तुरंत राहत देने वाला विकल्प बता रही है। जनता के लिए सवाल यह है कि सस्ती बिजली का असली समाधान किसके पास है?
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