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BJP president election : BJP अध्यक्ष के चुनाव में देरी की 3 बड़ी वजहें, चर्चा में ये 4 नाम

BJP president election : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर जारी असमंजस अब खत्म होने की कगार पर है। जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में समाप्त हो चुका है, लेकिन संगठनात्मक चुनावों की देरी के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी लगातार टलता रहा। अब तक 37 में से 26 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हो चुके हैं, लेकिन गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में चुनाव अभी बाकी हैं।

यूपी और गुजरात में नियुक्तियां न होने से चुनाव की राह अटकी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी की सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में संगठनात्मक नियुक्तियों का न होना है। इन राज्यों में जातीय संतुलन और राजनीतिक संदेश को ध्यान में रखकर नाम तय किए जाने हैं। चूंकि आने वाले समय में यहां विधानसभा चुनाव भी हैं, ऐसे में पार्टी हर कदम सोच-समझकर रख रही है।

मोदी की विदेश यात्रा और मानसून सत्र के बीच फंसी चुनावी तारीख

सूत्रों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटते ही अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। अगर ऐसा नहीं होता, तो यह 15 अगस्त के बाद ही संभव हो पाएगा, क्योंकि 21 जुलाई से 12 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र प्रस्तावित है। पार्टी मानसून सत्र से पहले ही चुनाव कराने की इच्छुक है।

अध्यक्ष पद की रेस में कौन-कौन?

1. शिवराज सिंह चौहान:

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आरएसएस की पहली पसंद माने जा रहे हैं। उनकी जनप्रिय छवि, संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं। वे चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और 1991 से 2004 तक सांसद भी रह चुके हैं।

2. मनोहर लाल खट्टर:

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री खट्टर को पीएम मोदी और आरएसएस दोनों का करीबी माना जाता है। दो बार मुख्यमंत्री रह चुके खट्टर को ईमानदार और अनुशासित नेता की छवि मिलती है, हालांकि उन पर कार्यकर्ताओं से सहज संवाद की कमी का भी आरोप है।

3. धर्मेंद्र प्रधान:

ओडिशा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान वर्तमान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं। वह सरकार और संगठन दोनों में लोकप्रिय हैं। मोदी और आरएसएस की पसंद माने जाते हैं। सांसद के रूप में उनका अच्छा खासा अनुभव है और वे पार्टी की अखिल भारतीय पहचान को मजबूत कर सकते हैं।

4. सुनील बंसल:

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बंसल राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने 2014 और 2017 में यूपी में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। अमित शाह के करीबी माने जाने वाले बंसल फिलहाल ओडिशा, बंगाल और तेलंगाना के प्रभारी हैं।

भले ही जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो चुका है, लेकिन संगठनात्मक प्रक्रियाओं के चलते बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में देरी कर रही है। अब जब अधिकतर राज्यों में संगठन चुनाव हो चुके हैं, तो अगले कुछ हफ्तों में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। सभी की निगाहें अब पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा और ‘नए चेहरे’ पर टिक गई हैं।

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