Women Reservation
Women Reservation Controversy : लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की योजना बना रही है, वहीं कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी बुधवार, 21 अप्रैल 2026 को देश के 29 प्रमुख शहरों में बड़े नेताओं के नेतृत्व में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण बिल की बारीकियों और सरकार की कथित साजिशों को जनता के सामने उजागर करना है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम हालिया संबोधन को ‘डर और घबराहट’ का प्रतीक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण की आड़ में एक ऐसा विभाजनकारी और गैर-लोकतांत्रिक परिसीमन थोपना चाहते थे, जिससे देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुँच सकता था। कांग्रेस के अनुसार, पीएम ने अपने 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया, जो उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। पार्टी का कहना है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर ‘घड़ियाली आंसू’ बहा रही है।
कांग्रेस ने सरकार के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि महिला आरक्षण को वर्तमान 543 सीटों के आधार पर बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि आरक्षण के लिए परिसीमन और जनगणना जैसी जो कठिन शर्तें जोड़ी गई हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि सदन में नया विधेयक लाकर महिलाओं को तत्काल 181 सीटें (एक तिहाई) दी जाएं। पार्टी का दावा है कि यदि सरकार इन शर्तों को हटाकर बिल लाती है, तो पूरा विपक्ष बिना किसी हिचकिचाहट के मोदी सरकार का समर्थन करेगा।
प्रधानमंत्री द्वारा सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी के दावे पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि बिल के मूल मसौदे में इस तरह की किसी बढ़ोतरी का कोई उल्लेख नहीं था। कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई है कि इस तरह के परिसीमन से दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व काफी कम हो जाएगा। असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का उदाहरण देते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी का एकमात्र एजेंडा सीटों की कांट-छांट कर सत्ता पर काबिज रहना है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी पिछड़े वर्ग (OBC) की महिलाओं को उनका अधिकार देने से बच रहे हैं। पार्टी का तर्क है कि यदि महिला आरक्षण जातिगत जनगणना के बाद लागू होता है, तो सरकार को अनिवार्य रूप से पिछड़े वर्ग की महिलाओं को कोटा देना होगा। प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के निरंतर दबाव के कारण ही प्रधानमंत्री को मजबूरी में जातिगत जनगणना की बात करनी पड़ी है, लेकिन उनकी मंशा अभी भी साफ नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कांग्रेस महिला सम्मान के बीजेपी के दावों की भी पोल खोलेगी। पार्टी ने मणिपुर हिंसा, हाथरस, उन्नाव, बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई और महिला पहलवानों के प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को ढाल बनाया है। साथ ही, कांग्रेस ने डेटा पेश करते हुए कहा कि बीजेपी के 240 सांसदों में केवल 12.9 प्रतिशत महिलाएं हैं और केंद्र के 72 मंत्रियों में सिर्फ सात महिलाएं हैं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के कई सांसदों और विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के गंभीर मामले दर्ज हैं।
अंत में, कांग्रेस ने याद दिलाया कि आज पंचायतों और निकायों में जो 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, वे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा लाए गए 73वें और 74वें संविधान संशोधन की देन हैं। कांग्रेस ने बीजेपी को चुनौती दी है कि वह महिला आरक्षण के पीछे छिपने के बजाय महंगाई, एलपीजी संकट और बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों पर महिलाओं का सामना करे। आगामी 21 अप्रैल को होने वाली 29 शहरों की प्रेस कॉन्फ्रेंस इस राजनीतिक लड़ाई को एक नया मोड़ देने वाली है।
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