Brazil Election : ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने चुनाव में जीत हासिल कर एक बार फिर देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। उनकी जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में दक्षिणपंथी नेताओं की लगातार मिल रही चुनावी सफलताओं का सिलसिला थम गया है। दूसरी ओर, उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों पर उठाए सवाल
पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव नतीजों को मानने से इनकार किया और चुनाव रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं, जिनके जवाब सामने आने चाहिए। उनके मुताबिक, कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना परिणामों को स्वीकार करना उचित नहीं होगा। हालांकि, चुनाव में धांधली के उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर जताई आपत्ति
फ्लावियो बोल्सोनारो ने मतदान केंद्रों को दो घंटे अतिरिक्त खुले रखने की अनुमति देने वाले न्यायिक आदेश पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि मतदान के बीच नियम बदलने से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। बताया गया कि परिवहन में देरी और खराब मौसम के कारण मतदान में परेशानी आने के बाद दोनों चुनावी खेमों ने मतदान का समय बढ़ाने का अनुरोध किया था। इस मुद्दे को लेकर चुनावी प्रक्रिया और नतीजों की वैधता पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
आधिकारिक नतीजों में लूला को 51.8 प्रतिशत वोट
आधिकारिक शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक लूला को 51.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो के खाते में 48.2 प्रतिशत मत आए। इस तरह दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 3.6 प्रतिशत रहा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, लूला का यह अंतर चार साल पहले की तुलना में अधिक था। चुनाव से पहले बहुत कम सर्वेक्षणों में इस परिणाम का अनुमान लगाया गया था, इसलिए उनकी जीत को राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला की वापसी
लूला की जीत की एक खास बात यह रही कि वह इस महीने की शुरुआत में हुए पहले दौर के मतदान में दूसरे स्थान पर थे। इसके बावजूद उन्होंने अंतिम मुकाबले में वापसी करते हुए जीत दर्ज की। साओ पाउलो में जीत के बाद दिए गए भाषण में 80 वर्षीय लूला ने मतदाताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्राजील के लोगों ने लंबे समय से उनके प्रति उदारता दिखाई है। लूला ने अपने चुनाव अभियान को लोकतंत्र के समर्थन में मिले जनादेश के रूप में पेश किया।

लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी जीत का सिलसिला टूटा
लूला की जीत से पिछले 18 महीनों में लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी नेताओं की लगातार सात चुनावी जीत का क्रम टूट गया। यह परिणाम बताता है कि क्षेत्र में वामपंथी राजनीति का प्रभाव अब भी बना हुआ है। लूला और बोल्सोनारो के बीच संगठित अपराध से निपटने तथा सुस्त अर्थव्यवस्था को गति देने जैसे मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे। इन नीतिगत मतभेदों का असर ब्राजील की भावी राजनीतिक और आर्थिक दिशा पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां भी होंगी अहम
चुनाव का प्रभाव आने वाले वर्षों में ब्राजील की संस्थाओं पर भी पड़ सकता है। राष्ट्रपति के पास देश के 11 सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट में खाली होने वाली चार सीटों पर न्यायाधीशों की नियुक्ति करने का अधिकार होगा। ऐसे में नई सरकार की नीतियों के साथ न्यायपालिका में होने वाली नियुक्तियां भी चर्चा का विषय रहेंगी। चुनावी नतीजों को लेकर उठे सवालों और राजनीतिक मतभेदों के बीच ब्राजील की लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।
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